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गीतांजलि

Language: हिंदी
Pages: 168
Edition: Second, 2011
Published Year: 2007
ISBN: 81-7056-395-

Original price was: ₹250.00.Current price is: ₹200.00.

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विश्वकवि रवीन्द्रनाथ ठाकुर को विश्व में जो ख्याति मिली, वह प्रत्येक भारतवासी के लिए गौरव की बात है। रवीन्द्रनाथ ठाकुर अप्रतिम मेधा और प्रतिभा के धनी थे तथा उनका कृतित्व एक पूरे युग का प्रतिनिधित्व करता है। संगीत, कला, साहित्य, दर्शन, शिक्षा जैसे अनेक क्षेत्रों में उनकी प्रतिभा के तेजस् आलोक ने पूरी मानवता को उपकृत किया। उनकी अद्वितीय काव्यकृति ‘गीतांजलि’ पर जब विश्व का सर्वोच्च नोबेल पुरस्कार घोषित हुआ तो संसार की सम्पूर्ण मनीषा उनकी मौलिक प्रतिभा की कायल हो गयी। रवि बाबू की ‘गीतांजलि’ कृति विश्व साहित्य में युग प्रवर्तक रचना के रूप में चर्चित हुई।
‘गीतांजलि’ की कविताएँ रवीन्द्रनाथ ठाकुर के चिन्तन का निचोड़ हैं तथा वे पूरी मानवता को सम्बोधित हैं। इन कविताओं की रहस्यवादिता अमूर्त होते हुए भी वायवी नहीं है, क्योंकि ये कविताएँ मनुष्यता और मानव प्रतिष्ठा को समर्पित हैं। भारतीय साहित्य की समृद्ध परम्परा में ‘गीतांजलि’ की कविताएँ सर्वथा भिन्न लगती हैं, किन्तु चकित करने वाली बात यह है कि ये कविताएँ भारतीय चिन्तन और संस्कृति के मूलभूत तत्त्वों से विन्यस्त हैं। अपनी अद्भुत बुनावट में ये कविताएँ मनुष्य और अदृश्य परमसत्ता के बीच संवाद हैं तो आम जन, समाज, राष्ट्र और विश्व का सतरंगी स्वप्न भी प्रस्तुत करती हैं, किन्तु यह सतरंगी स्वप्न मानव-वेदना से बिंधा हुआ है, अतः कोरा काल्पनिक नहीं है।
‘गीतांजलि’ ऐसी कालजयी कृति है जिसकी कविताओं के अनुवाद विश्व की लगभग सभी बड़ी भाषाओं में हो चुका है। हिन्दी में भी इस कृति के अनेक अनुवाद उपलब्ध हैं तथापि रंजना वर्मा द्वारा अनूदित इस कृति की कविताएँ मूल बांग्ला भाषा की परिपक्वता लिये हैं। इसलिए प्रस्तुत कृति का अलग ही महत्त्व है, जिसका अनुभव इन कविताओं को पढ़कर ही किया जा सकता है।

Weight325 g
Dimensions22.5 × 14.5 × 1.5 cm

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