मधु भट्ट तैलंग

डॉ. मधुभट्ट तैलंग भारतीय शास्त्रीय संगीत की प्रतिष्ठित विदुषी, शोधकर्ता एवं लेखिका हैं। उन्होंने राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर से हिन्दी एवं संगीत विषयों में स्नातकोत्तर उपाधियाँ तथा पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त की।

संगीत विषय के अध्ययन, शोध एवं लेखन में उनकी विशेष रुचि रही है। उनके सृजनात्मक एवं समीक्षात्मक लेख राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर की विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहे हैं। भारतीय संगीत की परम्पराओं, विशेषकर ध्रुपद गायन एवं वाद्य संगीत के अध्ययन में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है।

उनकी प्रमुख कृतियों में ध्रुपद गायन परम्परा तथा हिन्दुस्तानी संगीत के पखावज-वादन को वल्लभ सम्प्रदाय की देन विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। इन पुस्तकों में भारतीय शास्त्रीय संगीत की परम्पराओं, इतिहास एवं सांस्कृतिक आधारों का गहन विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।

डॉ. तैलंग को राजस्थान की प्रथम एवं एकमात्र ध्रुपद गायिका के रूप में विशेष पहचान प्राप्त है। संगीत, शोध एवं लेखन के क्षेत्र में उनका योगदान भारतीय शास्त्रीय संगीत की समृद्ध परम्परा को संरक्षित एवं प्रसारित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जाता है। उनकी कृतियाँ संगीत के विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं रसिकों के लिए मूल्यवान संदर्भ सामग्री हैं।

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