डॉ. अजय अनुरागी ने हिन्दी साहित्य तथा पत्रकारिता–जनसंपर्क में स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त की है। इसके अतिरिक्त इन्होंने हिन्दी विषय में एम.फिल. एवं पीएच.डी. की उपाधियाँ अर्जित की हैं। वे साहित्यिक पत्रिकाओं ‘एक और अन्तरीप’ तथा ‘अलख’ (त्रैमासिक) के संपादक रहे हैं।
डॉ. अजय अनुरागी हिन्दी व्यंग्य साहित्य के प्रमुख रचनाकारों में गिने जाते हैं। इनके प्रकाशित व्यंग्य संग्रहों में आदमी से सावधान, चरणम् शरणम् गच्छामि, चापलूसी का अनुशासन, साहित्य में पूँजी निवेश, तराजू में नेता, दबाव की राजनीति, कटी नाक का नेता, मंत्री का मटका, एक गधे की उदासी आदि उल्लेखनीय हैं। इनके व्यंग्य उपन्यासों में जयपुर तमाशा, बीच में सड़क तथा सीढ़ियों पर सपने प्रमुख हैं।
इसके अतिरिक्त कोट में टँगा आदमी (कहानी संग्रह), राँग नम्बर (नाटक), इस सदी के अंत में (कविता संग्रह), नई कविता और गिरिजाकुमार माथुर (आलोचना ग्रंथ) तथा आदमी जैसा आदमी (संपादित ग्रंथ) प्रकाशित हो चुके हैं। बाल साहित्य के क्षेत्र में भी इनके लगभग आठ संग्रह प्रकाशित हैं।
डॉ. अजय अनुरागी को साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए अनेक प्रतिष्ठित पुरस्कार प्राप्त हुए हैं। सन् 2023 में उन्हें राजस्थान साहित्य अकादमी का देवीलाल सामर पुरस्कार (नाट्य कृति राँग नम्बर) तथा जवाहरलाल नेहरू बाल साहित्य अकादमी का यशवंत रुचिर पुरस्कार (उपन्यास सीढ़ियों पर सपने) प्रदान किया गया। इसके अतिरिक्त जयपुर तमाशा उपन्यास के लिए उन्हें पृथ्वीनाथ भान सम्मान से भी सम्मानित किया गया।
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जब आपका शहर “स्मार्ट” हो जाता है… लेकिन आपकी ज़िंदगी नहीं बदलती तो क्या होता है?
जयपुर ताबीज़ एक संघर्षरत युवा की उलझनों, पीड़ा और हास्य को सजीव रूप में प्रस्तुत करता है, जो सपनों और हकीकत के बीच फँसा हुआ है। यह आज की तेज़ी से बदलती दुनिया में खुद को रुका हुआ महसूस करने वाले हर व्यक्ति की बेहद जुड़ी हुई कहानी है।
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“जंगल में दंगल” उपन्यास अपने पर्यावरण के विभिन्न घटकों को जानने एवं समझने की दृष्टि से रोचक शैली में लिखा गया है।
छोटी आयु वर्ग के बच्चों के मनोविज्ञान को ध्यान में रखकर इस उपन्यास की रचना की गयी है।
जंगल में छोटे-बड़े का भेदभाव दूर करते हुए सामूहिक आनन्दोत्सव में सहभागी बनते पात्रों से जीवंत दृश्यों की उपस्थिति इस कथा की खूबी है।
जंगली जीव-जन्तु केवल डर के प्रतीक नहीं होते, बल्कि वे हमारे दोस्त भी होते हैं। उनके सुख- दुख में शामिल होना हमारा मानवीय कर्त्तव्य भी है। उपन्यास से इस बात की पुष्टि होती है।
यह उपन्यास प्रेम, सद्भाव, सहयोग एवं सामाजिकता के परस्पर सम्बन्धों को उजागर करता है तथा बच्चों में साहस, शौर्य और शक्ति का समावेश करता है।
जंगली पात्रों पर आधारित यह कथा बच्चों के लिए रुचिकर है। इसे पढ़ना प्रकृति से जुड़ने के लिए जरूरी है।
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भारतीय धर्म ग्रन्थों में महाभारत को न केवल महत्त्वपूर्ण माना जाता है बल्कि पवित्र भी माना जाता है। इससे हमें धर्म एवं कर्म का संदेश मिलता है तथा श्रेष्ठ जीवन जीने की प्रेरणा प्राप्त होती है। प्रस्तुत पुस्तक में भारतीय संस्कृति से सम्बद्ध कहानियों को सरल एवं रोचक शैली में पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास…
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भारतीय धर्म ग्रन्थों में रामायण को न केवल महत्त्वपूर्ण माना जाता है बल्कि पवित्र एवं पूज्य भी माना जाता है। इससे हमें धर्म एवं कर्म का संदेश मिलता है तथा श्रेष्ठ जीवन जीने की प्रेरणा प्राप्त होती है। सामाजिक आदर्शों एवं मानव मूल्यों की स्थापना में जिन ग्रन्थों का मार्गदर्शन मिलता रहा है, रामायण उनमें…
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“चापलूसी का अनुशासन” एक ऐसा व्यंग्य संग्रह है जो व्यक्ति के भीतर छिपी चिपकी स्वार्थ और चापलूसी की प्रवृत्ति के छिलकों को उतारकर उजागर करने की कोशिश करता है। व्यक्ति अधिकारों के प्रति सजगता दिखा रहा है, किन्तु कर्त्तव्यों के प्रति उदासीन, ऐसा क्यों? ये व्यंग्य व्यक्ति के उन मनोवैज्ञानिक पक्षों का भी खुलासा करते…
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चरणम् शरणम् गच्छामि’ अजय अनुरागी के विविधता एवं नवीनता से युक्त प्रभावी व्यंग्यों का ऐसा संग्रह है जिसमें उपेक्षित एवं आम आदमी की पीड़ा को जुबान मिली है। इन व्यंग्यों में विज्ञापन जगत की अस्थायी चकाचौंध से लेकर राजनीति के झूठे झांसों व वादों के अभ्यस्तों, समाज की वैषम्यपूर्ण सोच से लेकर वैयक्तिक नैतिक पतन…
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व्यंग्य विधा समाज से सीधा सम्बध रखने वाली विधा है। बदलते सामाजिक संदभों में व्यंग्य समाज की जरूरत बन गया है। अजय अनुरागी के व्यंग्य समाज की इसी जरूरत को पूरा करते हैं। “साहित्य में पूँजी निवेश” में व्यंग्यकार अपने समय की सही और सच्ची तस्वीर प्रस्तुत करता है, भले ही वह कुरूप और भट्टी…
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“जयपुर तमाशा” के बाद “बीच में सड़क” अजय अनुरागी का दूसरा व्यंग्य उपन्यास है। एक छोटे मुहल्ले और छोटे लोगों के बसने और बिछुड़ने की त्रासदी की कथा है यह। पलायन और विस्थापन की पीड़ा के बीज इसमें बिखरे हुए हैं। एक बस्ती के बसने पर सुख-दुख, समस्याएँ- सुविधाएँ, संघर्ष-प्रेम, आत्मीयता-कटुता, समता- विषमता से सजा…
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समाज के वास्तविक चेहरे को उजागर करने वाला यह व्यंग्य संग्रह, आधुनिकता के नाम पर श्रम और मानवीयता के अवमूल्यन पर तीखा प्रहार करता है। यह राजनीति की अवसरवादिता और प्रशासन की निष्क्रियता पर कटाक्ष करते हुए आम आदमी की परेशानियों को उजागर करता है।
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Vetal Pachisi अजय अनुरागी द्वारा संकलित ‘वेताल पचीसी’ प्राचीन बोध कथाओं का एक रोचक संग्रह है। ये कथाएँ विक्रम और वेताल के माध्यम से नैतिक दुविधाओं, बुद्धिमत्ता, और न्याय के सिद्धांतों का ज्ञान प्रदान करती हैं। यह पुस्तक पाठकों को मनोरंजक तरीके से जीवन के गहरे पाठ सीखने में मदद करती है, जो बच्चों और वयस्कों दोनों के लिए उपयोगी है।
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Pauranik Kahaniya साहित्य एवं समाज के प्रति प्रतिबद्ध लेखक अजय अनुरागी की यह कृति पौराणिक ग्रंथों का विवेचन करके सरल एवं सुबोध शैली में प्रस्तुत की गई है। ‘पौराणिक कहानियाँ’ व्यक्तिगत जीवन में शुचिता और सामाजिक जीवन में नैतिकता की शिक्षा देती है, जो पौराणिक प्रतीकों के माध्यम से समता और सहिष्णुतापूर्ण समाज का स्वप्न देखती है, और समाज में जीवन मूल्यों को स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है।
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Purano Ki Kahaniya साहित्य, संस्कृति एवं समाज के विभिन्न विषयों को गंभीरता के साथ आत्मसात् करके लेखन करने वाले लेखकों में अजय अनुरागी का नाम विशेष उल्लेखनीय है। उनकी यह पुस्तक ‘पुराणों की कहानियाँ’ व्यक्तिगत जीवन में शुचिता और सामाजिक जीवन में नैतिकता की शिक्षा देती है। यह पौराणिक प्रतीकों के माध्यम से समता और सहिष्णुतापूर्ण समाज का स्वप्न देखती है, जो पाठकों के ज्ञान में वृद्धि करेगी।
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Seedhiyeon par Sapne डॉ. अजय अनुरागी का संग्रह ‘सीढ़ियों पर सपने’ जीवन की आकांक्षाओं, संघर्षों और सपनों पर आधारित कहानियों का एक अनूठा संकलन है। यह कृति मानवीय भावनाओं की गहराई में उतरकर, सपनों को साकार करने के लिए अथक प्रयासों और उनके रास्ते में आने वाली चुनौतियों को दर्शाती है, जो पाठकों को प्रेरित करती है।
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Wrong Number डॉ. अजय अनुरागी का उपन्यास ‘रॉंग नंबर’ अपनी विशिष्ट शैली और कथ्य के साथ पाठकों को एक नए अनुभव से रूबरू कराता है। यह कृति आधुनिक समाज की जटिलताओं, मानवीय संबंधों के उलझाव, और जीवन के अप्रत्याशित मोड़ों को व्यंग्यात्मक ढंग से प्रस्तुत करती है, जो पाठकों को सोचने पर विवश करेगी।
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Coat me Tanga Aadmee डॉ. अजय अनुरागी का प्रथम कहानी संग्रह “कोट में टँगा आदमी” कथात्मक व्यंग्य और व्यंग्यात्मक कथा का मिश्रण है। ये कहानियाँ कथ्य के स्तर पर पाठकीय संवेदना को उद्वेलित करती हैं और मानवीय विकारों, अभीप्साओं, तथा मनुष्य के अंतस की गहराई का मनोविश्लेषणात्मक आकलन करती हैं, जो समय और परिस्थितियों के अनुसार मनुष्य के अप्रासंगिक हो जाने की व्यथा को मार्मिकता से बुनती हैं।
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Ek Ghadhe ki Udasi डॉ. अजय अनुरागी का यह आठवाँ व्यंग्य संग्रह व्यक्ति एवं समाज की विडम्बनाओं, विरोधाभासी प्रवृत्तियों और मन के अंतर्विरोधों का प्रकटीकरण है। इसमें राजनीति के छल-छद्मों और समाज में व्याप्त विसंगतियों पर तीखा प्रहार किया गया है, जो पाठक को संघर्ष की मशाल उठाए प्रकाश बिखेरता हुआ दिखाता है।