विक्रय कला एवं विक्रय प्रबंध
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Vikray Kala avam Vikray Prabhand आज के वैश्विक और प्रतिस्पर्धी व्यापारिक परिदृश्य में, प्रभावी विक्रय कला और विक्रय प्रबंधन की अनिवार्यता पर प्रकाश डालती यह पुस्तक, डॉ. पी.पी. भार्गव द्वारा सरल और बोधगम्य भाषा में प्रस्तुत की गई है। यह वस्तु ज्ञान, मांग वृद्धि, और उपभोक्ता संरक्षण के सिद्धांतों का विस्तृत विवेचन करती है।
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आज व्यापारिक और वाणिज्यिक क्रियाओं का क्षेत्र किसी देश-विदेश की सीमाओं को लाँघकर अन्तर्राष्ट्रीय रूप ग्रहण कर चुका है। भले ही किसी वस्तु का उत्पादन अथवा निर्माण किसी क्षेत्र अथवा देश-विदेश की सीमा तक सीमित हो, किन्तु उसके उपभोक्ता विश्व के हर कोने में देखे जा सकते हैं। यही कारण है कि वस्तु निर्माताओं/उत्पादकों के लिये यह जरूरी हो गया है कि सम्पूर्ण विश्व में छितराए उपभोक्ताओं से सम्पर्क किया जाय। तभी उसकी संस्था अपना अस्तित्व बनाये रखेगी, अपने लक्ष्य प्राप्त कर सकेगी, व्यापारिक जगत् में अपनी विशिष्ट पहचान बना सकेगी और दिन दूनी रात चौगुनी प्रगति कर नये आयाम स्थापित करने में सफल होगी। उदारीकरण की दौड़ ने तो इस पहलू के महत्व को और उजागर कर दिया है।
आज निर्माता/उत्पादक की समस्या अपने उत्पाद का आर्थिक निर्माण/उत्पादन न होकर उसका मितव्ययी और प्रभावी विक्रय है। वस्तु सम्बन्धी ज्ञान, उसकी विशेषताएँ, उसके उपभोग से मिलने वाले लाभ और सन्तुष्टि की जानकारी उपभोक्ताओं तक पहुँचाकर ही माँग बढ़ाई जा सकती है, उसे स्थायी बनाया जा सकता है, उपभोक्ताओं का निरन्तर संरक्षण प्राप्त किया जा सकता है।
प्रस्तुत पुस्तक में इन लक्ष्यों को प्राप्त करने की दृष्टि से विक्रय कला के विभिन्न सैद्धांतिक और व्यावहारिक पहलुओं पर सरल, रोचक, बोधगम्य और धारा-प्रवाह भाषा में पूर्ण प्रकाश डाला गया है।
| Weight | 460 g |
|---|---|
| Dimensions | 22.5 × 14.5 × 2 cm |





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