शाहजहाँकालीन भारत (1628-1658)
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Shahjahankalin Bharat (1628-1658) मुगल साम्राज्य के स्वर्णकाल, शाहजहाँ के शासन (1628-1658 ई.) का ऐतिहासिक विवेचन। डॉ. एल.पी. माथुर और प्रो. एम.एल. मांडोत की यह पुस्तक आंतरिक शांति, सुदृढ़ शासन प्रबंध, सांस्कृतिक उन्नति (ताजमहल, तख्ते-ताऊस), और साम्राज्य की आर्थिक सुदृढ़ता का चित्रण करती है, साथ ही उत्तराधिकार युद्ध और औरंगजेब की धर्मान्धता जैसी दुःखद घटनाओं का भी विश्लेषण करती है।
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शाहजहाँ 4 फरवरी, 1628ई. से 30 जुलाई, 1658ई. तक दिल्ली के सम्राट के रूप में शासन करता रहा।
साम्राज्य में आन्तरिक शान्ति और सुरक्षा थी, शासन प्रबन्ध सुदृढ़ और प्रजा हितैषी था। सांस्कृतिक दृष्टि से उसका शासन मुगल साम्राज्य का स्वर्णकाल था। साम्राज्य की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ थी। सामाजिक जीवन आनन्दमय था और राजनीतिक स्थिरता थी। मुंगल साम्राज्य गौरव के चरमोत्कर्ष पर था। उसका शासन पैतृक स्नेह से युक्त था।
भवन निर्माण कला की दृष्टि से यह स्वर्ण युग था। ताजमहल और तख्ते-ताऊस इसी युग की कृति हैं। संगीत कला, चित्रकला, मूर्तिकला, साहित्य आदि क्षेत्रों में भी पर्याप्त उन्नति हुई।
शासन के अन्तिम चरण में शाहजहाँ के पुत्रों के बीच उत्तराधिकार का युद्ध, औरंगजेब की विजय, शाहजहाँ की कैद आदि दुःखद घटनाएँ थीं।
औरंगजेब द्वारा धर्मान्धता की नीति अपनाना अन्ततोगत्वा मुगल साम्राज्य के पराभव का कारण बना। सम्पूर्ण घटनाचक्रों का विवेचन ऐतिहासिक एवं प्रामाणिक तथ्यों के आधार पर किया गया है।
| Weight | 320 g |
|---|---|
| Dimensions | 22.5 × 15 × 1.5 cm |
| Genre | |
| Textbook Genre |







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