Sale!

सांख्यकारिका

Language: हिंदी
Pages: 184
Publisher: Jyoti Prakashan
Published Year: 2009
ISBN: 978-81-87988-37-3

Original price was: ₹300.00.Current price is: ₹240.00.

You Save 20%

In stock

Share:
GUARANTEED SAFE CHECKOUT
  • Visa Card
  • MasterCard

प्राचीन भारत में जिन दार्शनिक सिद्धान्तों का प्रणयन हुआ, उनमें सांख्य प्रमुख दर्शन के रूप में प्रतिष्ठित है। द्वैत मत का प्रतिपादक सांख्य दर्शन प्रकृति और पुरुष दोनों को मूल तत्त्व मानता है। सत्कार्यवाद के समर्थक सांख्य दर्शन के अनुसार कार्य अपने कारण में अव्यक्त रूप से विद्यमान रहता है। सांख्य दर्शन के प्रवर्तक महर्षि कपिल मुनि के ‘सांख्य सूत्र’ से लेकर विज्ञानभिक्षु के ‘सांख्य प्रवचन भाष्य’ की रचना तक सांख्य दर्शन की विकास यात्रा अनवरत रूप से चली है।
सांख्य के प्राचीन सिद्धान्त वेदान्त से मिलते थे, इसीलिए प्राचीन सांख्य मत ईश्वर की सत्ता स्वीकार करता है जबकि परवर्ती सांख्य ने निरीश्वरवादी विचारों को स्वीकार किया। इसीलिए भगवान बुद्ध सांख्य दर्शन से प्रभावित हुए। प्रस्तुत कृति सांख्य दर्शन के मूलभूत सिद्धान्तों तथा विविध रूपों की स्पष्ट और बोधगम्य समीक्षा करती है।
कपिल मुनि का ‘षष्टितंत्र’ सांख्य का प्राचीनतम ग्रन्थ है जिसमें साठ अध्यायों में पदार्थों का विवरण है। इस कृति में सांख्य मत के सभी आचार्यों और उनके ग्रन्थों का परिचय है। ईश्वर- कृष्ण ने सप्तति षष्टितंत्र के अर्थों को लेकर सांख्यकारिका लिखी है, जिसके श्लोकों की विशद् और विस्तृत व्याख्या इस कृति में की गयी है। सांख्य दर्शन सम्बन्धी जानकारी चाहने वाले जिज्ञासुओं के लिए यह एक अनिवार्य पुस्तक है।

Weight 375 g
Dimensions 22.5 × 14.5 × 1.5 cm

Reviews

There are no reviews yet.

Be the first to review “Sankhykarika”

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Need help?