राजस्थान के प्रमुख शक्तिपीठ
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Rajasthan Ke Pramukh Shaktipeeth ‘राजस्थान के प्रमुख शक्तिपीठ’ नामक इस पुस्तक में तीस से अधिक प्राचीन देवी मंदिरों का इतिहास, लोकमान्यता, स्थापत्य, और कलात्मक महत्व को उजागर किया गया है। डॉ. राघवेन्द्र सिंह मनोहर द्वारा लिखित यह कृति शक्तिपूजा की प्राचीन परंपरा और लोक आस्था के केंद्रों का ऐतिहासिक साक्ष्यों के साथ सहज और रोचक ढंग से वृतांत प्रस्तुत करती है।
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राजस्थान के प्रमुख शक्तिपीठ’ नामक इस पुस्तक में राजस्थान के विभिन्न भागों में विद्यमान तीस से अधिक प्राचीन देवी मन्दिरों का इतिहास, उनकी लोकमान्यता, मन्दिरों के स्थापत्य, इनमें प्रतिष्ठापित अत्यन्त सुन्दर और सजीव देव प्रतिमाओं के कलात्मक महत्त्व और सांस्कृतिक वैभव को उजागर किया गया है। राजस्थान सदा से ही वीरता और शौर्य की क्रीड़ास्थली रहा है। यहाँ का इतिहास धरती की पाटी पर लहू से लिखा इतिहास है। वीरता की प्रेरणा देने वाली शक्ति की आराधना राजस्थान के लोकजीवन का महत्त्वपूर्ण अंग रही है। राजस्थान के प्रायः प्रत्येक अंचल में कोई न कोई शक्तिपीठ अवश्य विद्यमान है।
शक्तिपीठों के स्थानीय नामकरण से पता चलता है कि यहाँ शक्तिपूजा की बहुत प्राचीन और व्यापक परम्परा रही है जो लोकजीवन से घनिष्ठ रूप से जुड़ी है। यह परम्परा शताब्दियों से अक्षुण्ण चली आयी है। राजस्थान के शक्तिपीठ चिरकाल से लोक आस्था के केन्द्र रहे हैं जहाँ नवरात्र और अन्य पर्वों पर विशाल मेले भरते हैं।
इस पुस्तक में धार्मिक आस्था के प्रतीक राजस्थान के प्राचीन और प्रमुख देवी मन्दिरों का वृतान्त ऐतिहासिक साक्ष्यों के विवेचन-विश्लेषण के उपरान्त बहुत सहज और रोचक ढंग से प्रस्तुत किया गया है। देवी मन्दिरों में प्रतिष्ठापित शक्ति के विविध स्वरूपों, वहाँ उत्कीर्ण शिलालेखों तथा उनसे सम्बन्धित ऐतिहासिक सन्दर्भों को भी समाविष्ट किया गया है। प्रायः सभी प्रमुख देवी प्रतिमाओं के सुन्दर और सजीव रंगीन छायाचित्र दिये गए हैं जिससे पुस्तक बहुत रोचक और उपयोगी बन पड़ी है। देशी-विदेशी पर्यटकों, राजस्थान के इतिहास, कला और संस्कृति में रुचि रखने वाले प्रत्येक पाठक के लिए यह पुस्तक उपयोगी और संग्रहणीय है।
| Weight | 375 g |
|---|---|
| Dimensions | 22.5 × 14 × 2 cm |
| Genre |





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