पुस्तकालय सूचीकरण के सिद्धांत
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प्रस्तुत पुस्तक ‘पुस्तकालय सूचीकरण के सिद्धान्त’ में पुस्तक सूचीकरण के प्रत्येक पक्ष को उजागर करने का प्रयास किया गया है। पुस्तक को छात्रोपयोगी बनाने के लिये बी.लिब व एम.लिब. एस-सी. के पाठ्यक्रमों को ध्यान में रखा गया है। इन्दिरा गाँधी खुला विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम को विशेष रूप से पुस्तक के कलेवर में समेटने का प्रयत्न किया गया है। क्लासीफाईड, कैटैलोग कोड (पंचम संस्करण) ए.ए.सी.आर. (II) दोनों के सिद्धान्तों के आधार पर प्रविष्टियों का वर्णन है तथा जहाँ आवश्यकता हुई दोनों पद्धतियों का तुलनात्मक विवरण भी प्रस्तुत किया है।
पुस्तक में सूचीकरण के क्षेत्र की नवीनतम जानकारी दी गई है एवं सूचीकरण की हर विधा पर ध्यान रखा गया है। नॉन बुक मैटीरियल, मार्क, सी.डी. रोम आदि सभी आधुनिक तकनीकों का समावेश भली प्रकार समझाया गया है। विषय सम्बन्धी सभी पहलुओं को छुआ गया है।
पुस्तक की भाषा एवं शैली को सरल बनाने के लिये साधारण बोलचाल की भाषा का प्रयोग किया गया है। हिन्दी के शब्दों के साथ अँग्रेजी के दिन-प्रतिदन बोले जाने वाले शब्द भी दिये गये हैं और कहीं-कहीं तो हिन्दी के क्लिष्ट शब्दों के स्थान बोलचाल के अँग्रेजी शब्दों का ही प्रयोग किया गया है जिससे कि विषय को समझने में कठिनाई नहीं हो।
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अनुक्रम
- पुस्तकालय सूचीकरण : आवश्यकता, उद्देश्य, परिभाषा एवं कार्य
- पुस्तकालय सूचीकरण : विकास एवं प्रमुख संहिताएँ
- पुस्तकालय सूची के स्वरूप
- सूचीकरण के आदर्शक सिद्धान्त
- प्रविष्टियाँ : रूप एवं निर्माण
- प्रविष्टि-पत्रकों का फाइलीकरण
- लेखक के नाम का वरण
- समष्टि लेखक
- सम्मिश्रित ग्रन्थों का सूचीकरण
- बहुखण्डीय ग्रन्थ
- अपुस्तकीय सामग्री का सूचीकरण
- विषयात्मक सूचीकरण
- केन्द्रीय सूचीकरण
- सहकारी सूचीकरण
| Weight | 345 g |
|---|---|
| Dimensions | 22.5 × 14.5 × 1.5 cm |
| Textbook Genre |



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