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पत्रकारिता के प्रेरक प्रसंग

Language: हिंदी
Pages: 200
Edition: First
Published Year: 2008
ISBN: 978-81-7056-427-0

Original price was: ₹300.00.Current price is: ₹240.00.

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पत्रकारिता का इतिहास जैसे-जैसे दीर्घ से दीर्घतर होता जा रहा है और उसके कर्म-क्षेत्र की परिधि का तीव्र गति से विस्तार हो रहा है, विमर्श के लिए विषय-वैविध्य भी निरन्तर बढ़ रहा है। जन- जीवन के स्पन्दन और हरदम बढ़ती उसकी हलचलों को वाणी देने के लिए एक ओर स्थापित समाचार- पत्रों में सामग्री के प्रस्तुतीकरण में नवीन भंगिमाएँ दृष्टिगोचर हो रही है, तो दूसरी ओर नूतन पत्र- पत्रिकाओं का आविर्भाव हो रहा है। नई-नई प्रतिभाएँ और शख्सियत अपने पत्रकारी कौशल के नये कीर्तिमान स्थापित कर रही हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में हो रहे इस युगान्तर के दौर में इस कार्य को अपनाने वाले युवाओं में यह जानने की भी प्रबल लालसा है कि वे जिनके वंशधर हैं, उनके जीवन मूल्य और प्रतिमान क्या थे, उनकी परम्पराएँ और स्वधर्म के निर्वाह के लिए उनके द्वारा किये गये संघर्षों की सघनता और उत्कटता क्या थी।

ऐसे में पत्रकारिता के अध्येताओं की मांग भी ऐसी पुस्तकों के लिए बराबर बढ़ रही है, जो उनकी जिज्ञासाओं को शान्त कर उनके संचित ज्ञान में वृद्धि कर सके। इसी दिशा में उन्मुख लगभग आधी सदी के पत्रकारीय अनुभव से सम्पन्न वरिष्ठ पत्रकार डॉ. मनोहर प्रभाकर की लेखनी से प्रसूत यह पुस्तक जहाँ पत्रकारिता-जगत की अलपज्ञात विभूतियों और पत्रों के योगदान को उजागर करती है, वहाँ मीडिया से जुड़े अनेक यक्ष प्रश्नों और ज्वलन्त मुद्दों पर भी वैचारिक मंथन प्रस्तुत करती है।

Weight385 g
Dimensions22.5 × 14.5 × 1.5 cm

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About the Author

डॉ. मनोहर प्रभाकर

डॉ. मनोहर प्रभाकर (भांडारेज, दौसा) हिन्दी व अंग्रेजी में एम.ए. एवं पीएच.डी. उपाधि प्राप्त देश के मूर्धन्य पत्रकार, साहित्यकार और जनसम्पर्क विशेषज्ञ हैं। राजस्थान शासन के सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग में निदेशक पद से सेवानिवृत्त डॉ. प्रभाकर की 50 से…

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