“BLISS : Renaissance to Commonwealth (1550-1660) (OLD SYLLABUS)” has been added to your cart.
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कर्मभूमि मुंशी प्रेमचंद का एक विचारप्रधान सामाजिक-राजनीतिक उपन्यास है। इसमें स्वतंत्रता आंदोलन के समय की सामाजिक असमानता, जाति-भेद, नारी-स्थिति और नैतिक संघर्षों को यथार्थवादी ढंग से प्रस्तुत किया गया है। यह उपन्यास कर्म, त्याग और सामाजिक उत्तरदायित्व का संदेश देता है।
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अंतिम खंड में प्रेमचंद के अनुभवों और विचारों की परिपक्व अभिव्यक्ति देखने को मिलती है। यथार्थ, दर्शन और मानवीय संवेदना से भरपूर ये कहानियाँ प्रेमचंद के साहित्यिक योगदान को पूर्णता प्रदान करती हैं।
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इस भाग में तीव्र सामाजिक चेतना से युक्त कहानियाँ संकलित हैं, जो पाखंड, अन्याय और नैतिक पतन पर प्रहार करती हैं। ये कहानियाँ आज के समय में भी उतनी ही प्रासंगिक और प्रभावशाली हैं।
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इस खंड की कहानियाँ सामाजिक सुधार, शिक्षा और बदलते सामाजिक मूल्यों पर केंद्रित हैं। इसमें स्वतंत्रता-पूर्व भारत की सामाजिक परिस्थितियों और परिवर्तनशील सोच का सजीव चित्रण मिलता है।
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इस भाग में किसान जीवन, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, शोषण और संघर्ष को प्रमुखता दी गई है। प्रेमचंद की कहानियाँ समाज के दबे-कुचले वर्ग की पीड़ा को संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत करती हैं और सामाजिक न्याय की भावना को मजबूत करती हैं।
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इस खंड की कहानियाँ मनोवैज्ञानिक दृष्टि से अधिक सशक्त हैं। पात्रों के अंतर्द्वंद्व, नैतिक संघर्ष और मानवीय दुर्बलताओं का सूक्ष्म चित्रण इस भाग को विशेष बनाता है। यह प्रेमचंद की साहित्यिक परिपक्वता को दर्शाता है।
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इस भाग में सामाजिक विषमता, जाति-भेद और परंपरा बनाम सुधार के संघर्ष को प्रभावशाली ढंग से दर्शाया गया है। कहानियाँ समाज की कड़वी सच्चाइयों को उजागर करती हैं और प्रेमचंद की सामाजिक चेतना को स्पष्ट रूप से सामने लाती हैं।
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इस खंड की कहानियाँ पारिवारिक संबंधों, नैतिक मूल्यों और मानवीय संघर्षों पर केंद्रित हैं। नारी जीवन, त्याग, करुणा और कर्तव्य जैसे विषयों को गहराई से प्रस्तुत किया गया है, जो पाठक को आत्मचिंतन के लिए प्रेरित करता है।
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यह पुस्तक काव्य के विभिन्न अंगों—रस, छन्द, अलंकार, रीति आदि—का सरल एवं व्यवस्थित विवेचन प्रस्तुत करती है। इसमें 84 छन्दों, 74 अलंकारों, 14 काव्य दोषों तथा हिन्दी-अंग्रेजी अलंकारिक शब्दों का उदाहरण सहित वर्णन किया गया है। काव्य-शास्त्र को समझने और उसका सही आस्वादन करने के लिए यह एक उपयोगी एवं समग्र कृति है, जो विद्यार्थियों, शिक्षकों, शोधकर्ताओं एवं प्रतियोगी परीक्षार्थियों के लिए विशेष रूप से लाभकारी सिद्ध होती है।
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अनुक्रम हिन्दी भाषा तथा हिन्दी का विकास हिन्दी की उपभाषाएँ तथा बोलियाँ हिन्दी की ध्वनियाँ और उनका विकास हिन्दी शब्द समूह तथा शब्द रचना हिन्दी में वाक्य रचना हिन्दी का अर्थ विज्ञान देवनागरी लिपि : स्वरूप तथा विकास राष्ट्रभाषा हिन्दी का मानकीकरण भारतीय संविधान और हिन्दी हिन्दी : अन्तर्राष्ट्रीय सन्दर्भ संचार माध्यम और हिन्दी
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विश्वविद्यालय की स्थापना जिन कार्यों के निष्पादन के लिए होती है, उनमें शोध कार्य कराना उसका सबसे महत्त्पूर्ण कार्य होता है। शोध का मूल अर्थ है-ज्ञान के उस अनुषंग को प्रकाश में लाना जिसके विषय में हम अभी तक अभिज्ञ हैं। संसार का सारा वैज्ञानिक तथा ज्ञानात्मक विकास मनुष्य के शोध कार्यों का ही परिणाम है। विश्वविद्यालय के विभिन्न विभाग अपने-अपने विषय में शोध कराते हैं। इस तरह वे अपने क्षेत्र की ज्ञान सम्पदा को प्रकाश में लाते हैं और इस दिशा में आगे की पीढ़ी का मार्ग प्रशस्त करते हैं।
शोध एक वैज्ञानिक और वैधानिक प्रक्रिया है जो सतत् साधना, योजनाबद्ध कार्य तथा एक सुनिश्चित विधान की अपेक्षा रखती है। हिन्दी में शोध कार्य का इतिहास बहुत पुराना नहीं है तथा देश-विदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों के हिन्दी तथा भाषा विभागों में लम्बे अरसे से शोध कार्य हो रहे हैं।
शोध कार्यों की परम्परा-समृद्धि के साथ-साथ हिन्दी में शोध-प्रविधि पर सैद्धान्तिक ग्रन्थों का प्रणयन भी होता रहा है। विकास की इस प्रक्रिया में शोध का शास्त्र ही विकसित हो गया है। डॉ. मनमोहन सहगल की प्रस्तुत कृति हिन्दी में शोध-तंत्र के सैद्धान्तिक और व्यावहारिक पक्षों का गम्भीर और विशद् आख्यान करती है। पुस्तक के सैद्धान्तिक विवेचन में विद्वान लेखक ने शोध की परिभाषा, शोध के प्रकार, पाठ-शोध विधि, शोध की पद्धतियाँ आदि का विस्तृत विवेचन किया है तो द्वितीय खण्ड में शोध के व्यावहारिक पक्षों का सम्यक् उद्घाटन किया गया है। शोध-शास्त्र को समझने तथा शोधकर्ताओं के लिए यह एक अपरिहार्य पुस्तक है।
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₹100.00 Original price was: ₹100.00.₹80.00Current price is: ₹80.00.
रीतिकालीन मुक्त काव्य धारा के अग्रणी कवि घनानंद का रीतिकाल के कवियों में विशिष्ट स्थान है, क्योंकि घनानंद के काव्य में हृदय की कोमल भावनाओं और प्रेम की पीर की सहज और मार्मिक अभिव्यक्ति हुई है। उनके कवित्तों को पढ़कर लगता है कि घनानंद ने अपने हृदय की घनीभूत पीड़ा को अपने कवित्तों में उंडेल दिया है। कृष्ण भक्त कवि घनानंद मूलतः प्रेम के कवि हैं और प्रेम में भी विप्रलम्भ की हृदयस्पर्शी व्यंजनाओं के क्षेत्र में वे अप्रतिम हैं। मन की गहराई से निकली घनानंद की कविता में ब्रजभाषा का जो स्वाभाविक और परिष्कृत रूप प्रवाहित हुआ है, वह उन्हें काव्य के क्षेत्र में सबसे अलग पहचान देता है। घनानंद के कवि व्यक्तित्व का निर्माण करने वाले कवित्तों में गहरी वेदना, तीक्ष्ण उपालम्भ तथा प्रेम-विवशताजन्य असहायता के जैसे चित्र उकेरे गये हैं, वे अन्यत्र नहीं मिलते।
प्रस्तुत कृति में लेखक ने आचार्य विश्वनाथ मिश्र द्वारा सम्पादित ‘घनानंद कवित्त’ के प्रथम सौ कवित्तों का भाष्य तथा घनानंद की काव्यगत विशेषताओं का विस्तृत आकलन किया है। यह कृति घनानंद के पाठकों की घनानंद काव्य-विषयक जिज्ञासाओं का सम्यक् समाधान करेगी।
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₹250.00 Original price was: ₹250.00.₹200.00Current price is: ₹200.00.
विषय-सूची वक्तव्य (प्रथम संस्करण) वक्तव्य (द्वितीय संस्करण) मलिक मुहम्मद जायसी पदमावत स्तुतिखंड सिंहलद्वीप वर्णन खंड जन्म खंड मानसरोदक खंड सुआ खंड रत्नसेन जन्म खंड बनिजारा खंड नागमती सुआ संवाद खंड राजा-सुआ संवाद खंड नखशिख खंड प्रेमखंड जोगी खंड राजा-गजपति-संवाद खंड बोहित खंड सात समुद्र खंड सिंघलदीप खंड मंडपगमन खंड पदमावती-वियोग-खंड पदमावती-सुआ-भेंट-खंड बसंत खंड राजा रत्नसेन…
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NEP 2020Sem-2
₹300.00 Original price was: ₹300.00.₹240.00Current price is: ₹240.00.
यह पुस्तक जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर के सेमेस्टर 2 (भूगोल) के नवीनतम पाठ्यक्रम पर आधारित है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुरूप तैयार की गई यह पुस्तक विद्यार्थियों को सरल भाषा में स्पष्ट, संगठित एवं परीक्षा-केंद्रित अध्ययन सामग्री प्रदान करती है।
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NEP 2020Sem-1
₹70.00 Original price was: ₹70.00.₹56.00Current price is: ₹56.00.
This book has been prepared in accordance with the latest curriculum of the National Education Policy (NEP) 2020, with the aim of providing students a clear, systematic, and examination-oriented understanding of the subject.
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NEP 2020Sem-1
₹90.00 Original price was: ₹90.00.₹72.00Current price is: ₹72.00.
This book has been prepared in accordance with the latest curriculum of the National Education Policy (NEP) 2020, with the aim of providing students a clear, systematic, and examination-oriented understanding of the subject.
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₹100.00 Original price was: ₹100.00.₹80.00Current price is: ₹80.00.
यह पुस्तक महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय, बीकानेर के सेमेस्टर 1 (हिन्दी) के नवीनतम पाठ्यक्रम पर आधारित है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुरूप तैयार की गई यह पुस्तक विद्यार्थियों को सरल भाषा में स्पष्ट, संगठित एवं परीक्षा-केंद्रित अध्ययन सामग्री प्रदान करती है।