नेहर छुट्यो जाय
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प्रेम की उदात्तता और आध्यात्मिक संवेदना की कोमल कथा। यह उपन्यास किशोरावस्था से विकसित होते प्रेम के पवित्रतम रूप को दर्शाता है, जो भौतिक धरातल से उठाकर आध्यात्मिक स्तर तक ले जाता है और ब्रह्मानंद सहोदर बन जाता है।
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प्रेम मनुष्य को मिला ईश्वर का सर्वश्रेष्ठ वरदान है। यही अहसास उसे पशुत्व के स्तर से ऊपर उठाता है। बुद्धिवादी लोग भले ही इसे काम- चेतना से अभिन्न पाशविक स्तर की मूल इंस्टिंक्ट मानते हों, वस्तुतः यह सर्वथा भिन्न स्तर की आध्यात्मिक संवेदना है, जिसे सहज ही भक्ति के समकक्ष रखा जा सकता है। शाक्त धर्म में तो काम-क्रीड़ा को साधना का अंग ही माना गया है। प्रेम का सम्बन्ध स्त्री-पुरुष के शारीरिक उद्वेलन भर से नहीं है प्रत्युत प्रेम की भावना दोनों को भौतिक धरातल से उठाकर आध्यात्मिक स्तर तक ले जाती है। सच्चा प्रेम स्त्री-पुरुष को दैवी-चेतना से सम्पन्न कर ऐसे लोक में ले जाता है जहाँ सारे द्वन्द्व स्वतः ही समाप्त हो जाते हैं।
यह उपन्यास ऐसे ही उदात्त प्रेम की कोमल कथा है, जिसका अंकुर किशोरावस्था में फूटता है और निरन्तर उदात्त से उदात्ततर होता जाता है। उदात्तता के इस विकास में प्रेम का पवित्रतम रूप हमारे जीवन में प्रकट होता है और अन्ततः वह ब्रह्मानन्द सहोदर बन जाता है।
| Weight | 360 g |
|---|---|
| Dimensions | 22.5 × 14.5 × 1.5 cm |
| Genre |








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