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मुगल चित्रशैली

Language: हिंदी
Pages: 162
Edition: First
Published Year: 1998
ISBN: 81-7056-147-7

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मुगल चित्रकला के विभिन्न पहलुओं का विश्लेषणात्मक विवरण वर्तमान पुस्तक की विशेषता है। इस सन्दर्भ में पाण्डुलिपि एवं व्यक्ति-चित्रों के लक्षणों की विशिष्ट व्याख्या को समुचित स्थान दिया गया है। ‘आत्म-चित्र’ जिसके सर्वप्रथम दृष्टान्त मुगल चित्र शैली में उपलब्ध हैं, भारताय कला के इतिहास में एक नवीन अध्याय का श्रीगणेश करते हैं। मुगल कलाकारों की इस अनुपम देन का विवरण छात्रों के लिये सर्वथा नवीन है। इसी प्रकार ‘हाशिया अलंकरण’, जो सत्रहवीं शताब्दी के मुगल चित्रों की एक अनुपम विशेषता है, की विस्तृत व्याख्या स्वयं में महत्त्वपूर्ण है। कला की दृष्टि से मुगल हाशिया-चित्र भारतीय कला में सर्वथा एक नवीन अलंकरण पद्धति के प्रतीकमान हैं। पशु-पक्षी एवं पुष्प-चित्रण, जो मुगल शैली में स्वाभाविकता के परिचायक हैं, का समकालीन ऐतिहासिक दृष्टान्तों के साथ लेखक द्वारा प्रस्तुत किया गया विवरण रुचिकर है।

पुस्तक में चित्र-फलकों का चुनाव मुगल-चित्रों को विषय-सम्बन्धी विविधता को तो प्रस्तुत करता ही है, सांथ ही, यह सामग्री विषय को अवबोध्य, आकर्षक एवं रुचिकर बनाने में भी सहायक है। इस प्रसंग में रेखा-चित्र (नं. 1-10) मुगल चित्र शैली के विशिष्ट लक्षणों एवं आकारों के निरूपण की विभिन्न पद्धतियों की विस्तृत व्याख्या में उपयोगी हैं।

शोध-छात्रों के लिये भी वर्तमान पुस्तक नये आयाम प्रस्तुत करती है। पुस्तक के अन्त में दी गई ग्रन्थों की सूची इस दृष्टि से महत्त्वपूर्ण है। साथ ही, प्रत्येक पाठ में सन्दर्भित पुस्तकें एवं लेख गहन शोध-कार्य के लिए उपयोगी हैं।

मुगल चित्रकला, जिसका प्रादुर्भाव सोलहवीं सत्रहवीं शताब्दी में मुगल सम्राटों के संरक्षण में हुआ, भारतीय चित्रकला में विशेष स्थान रखती है। इसका कला जगत में विशेष सोगदान ऐतिहासिक पाण्डुलिपि-चित्रों, वास्तविक व्यक्ति-चित्रों तथा पशु-पक्षियों के स्वाभाविक चित्रण के सन्दर्भ में अतुल्य है। यहाँ यह कहना अनावश्यक न होगा कि मुगल चित्र कला के विभिन्न पहलुओं का ऐतिहासिक विवेचन तथा कलात्मक विधि-विधान की विस्तृत व्याख्या हिन्दी में प्रकाशित ग्रन्थों में सर्वथा दुर्लभ ही है। इसी तथ्य-विशेष को ध्यान में रखते हुए वर्तमान पुस्तक का स्थान विशिष्ट है। इस पुस्तक में विषय-सामग्री का निर्वाह समकालीन ऐतिहासिक स्त्रोतों के आधार पर वैज्ञानिक एवं शोधपूर्ण दृष्टिकोण से किया गया है तथा यह मुगल चित्रकला का सर्वाधिक रूप से क्रमबद्ध, विवेचनात्मक एवं पूर्ण इतिहास का बोध कराती है।

Weight600 g
Dimensions25 × 19 × 2 cm

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About the Author

Dr. Som Prakash Varma

डॉ. सोम प्रकाश वर्मा (जन्म: 1942) भारतीय कला-इतिहास, मध्यकालीन मुगल चित्रकला और दृश्य-संस्कृति के मूर्धन्य विद्वान, लेखक एवं लब्धप्रतिष्ठ कलाकार हैं। वे अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग (सेंटर ऑफ एडवांस्ड स्टडी) में प्रोफेसर के रूप में सेवारत रहे हैं।…

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