मंत्री बनकर रहेगे
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Mantri Bankar Rahenge अल्पना शर्मा की यह व्यंग्य रचनाएँ छोटी-छोटी विसंगतियों को उठाकर उन्हें व्यापक फलक प्रदान करती हैं। यह संग्रह उन विद्रूपताओं को उजागर करता है जिनकी अक्सर अनदेखी की जाती है, और लेखिका की भाषा में कटाक्ष और शालीन परिवेश का अद्भुत मेल है, जो मानव मन के मनोविज्ञान को भली प्रकार समझता है।
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छोटी-छोटी विसंगतियों को उठाकर उन्हें व्यापक फलक प्रदान कर देना अल्पना शर्मा की व्यंग्य रचनाओं की विशिष्ट पहचान है। जिन विद्रूपताओं की अनदेखी करके छोड़ दिया जाता है, लेखिका ने इस संकलन में संकलित व्यंग्यों में अपनी बात का बड़ा फलक दिया है। वैसे अल्पना का यह संग्रह पहला है, लेकिन उनकी व्यंग्य रचनाएँ देश की छोटी-बड़ी पत्रिकाओं में वर्षों से स्थान पा रहीहैं। रोचक परिवेश उत्पन्न कर देने की वजह से इनका एक पाठक वर्ग भी तैयार हुआ है, जो उन्हें नयी- नयी रचनाएँ लिखने को प्रेरित करता रहा है। व्यंग्य की सार्थकता भी यही है कि उसे अपना एक पाठक वर्ग मिले तथा शैली को पहचान भी। भाषा प्रवाह की दृष्टि से भी अल्पना शर्मा के व्यंग्य धारामय हैं।
कल्पनाशीलता से अपने आसपास के विद्रूप घटनाक्रम को विस्तार दे देना भी किसी रचनाकार की रचना प्रक्रिया को आगे बढ़ाता है। अल्पना के व्यंग्य इसका जीवन्त साक्ष्य हैं। उनकी भाषा में कटाक्ष है गहरा तथा शालीन परिवेश से वे गम्भीरता को भी विलुप्त नहीं होने देती। अखबारी लेखन ने व्यंग्य की गम्भीरता को चोट तो पहुँचाई है, लेकिन इसके विधा स्वरूप को मजबूत भी किया है। इसलिए ये रचनाएँ दैनिक पत्रों में भी स्थान पाकर अपना महत्त्व नहीं खो पाई हैं। अल्पना का व्यंग्य संसार मानव मन के मनोविज्ञान को भली प्रकार से समझता है और वह चरित्रों को भी सघनता उभारने में कामयाब रहा है।
अल्पना शर्मा का यह संकलन अपनी उपस्थिति गर्माहट के साथ दर्ज करायेगा तथा पाठकों को यह विश्वास भी देगा कि लेखिका और अधिक गर्मजोशी की व्यंग्य रचनाएँ अपने आगामी संकलन में दे पायेंगी।
| Weight | 250 g |
|---|---|
| Dimensions | 22 × 14.5 × 1 cm |
| Genre |




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