मध्यकालीन राजस्थान का इतिहास
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Madhyakalin Rajasthan Ka Itihas भारत में मुस्लिम राज्य की स्थापना से लेकर राणा प्रताप और वीर दुर्गादास राठौड़ के समय तक के मध्यकालीन राजस्थान का इतिहास, साहस, शौर्य और बलिदान की एक अनुपम गाथा है। डॉ. कालूराम शर्मा की यह पुस्तक राजपूत शासकों की सैनिक गतिविधियों, कूटनीति और स्वतंत्रता के आदर्शों का प्रामाणिक एवं आलोचनात्मक विवेचन प्रस्तुत करती है।
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भारत में मुस्लिम राज्य की स्थापना से लेकर राणा प्रताप एवं वीर दुर्गादास राठौड़ के समय तक मध्यकालीन राजस्थान का इतिहास साहस, शौर्य और बलिदान की एक अनुपम गाथा है। बार-बार की पराजयों के उपरान्त भी राजपूतों ने अपना आत्मविश्वास नहीं खोया और अवसर मिलते ही अपनी स्वतन्त्रता और सर्वोच्चता को स्थापित करने के लिये सक्रिय हो जाते थे। औरंगजेब की मृत्यु के बाद भारतीय राजनीति में अपना महत्त्व पुनः स्थापित कर लिया था, परन्तु दक्षिण की नवोदित मराठा शक्ति ने उनकी कमर तोड़ दी।
प्रस्तुत पुस्तक में मध्यकालीन राजपूत शासकों की सैनिक गतिविधियों, कूटनीति के प्रयोगों एवं स्वतन्त्रता के आदर्शों का प्रामाणिक एवं आलोचनात्मक विवेचन प्रस्तुत किया गया है। साथ ही इसमें सामाजिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों की झाँकी भी प्रस्तुत की गई है।
| Weight | 700 g |
|---|---|
| Dimensions | 22.5 × 15 × 3 cm |
| Genre | |
| Textbook Genre |















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