Madhyakalin Bharat Ka Itihas (1656-1761 E.)
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किसी भी सुदृढ़ साम्राज्य की सततता के लिए स्थायी, दृढ़ और जनकल्याण उत्प्रेरक नीतियों की स्थापना अनिवार्य प्रक्रिया है। दूरदर्शी अकबर ने मुगल साम्राज्य को जो राजनीतिक और सांस्कृतिक गौरव प्रदान किया था वह औरंगजेब और उसके उत्तराधिकारियों के युग में धराशायी हो गया। मुगलों में उत्तराधिकार की स्थायी और निश्चित परम्परा न होने से मुगल पुत्र प्रारम्भ से ही शक्तिशाली अमीरों से सांठगांठ कर अपने- अपने-अपने गुट बनाकर निजी शक्ति संचय में संलग्न हो जाते थे। उनका मुख्य उद्देश्य किसी भी प्रकार सत्ता प्राप्ति होता था। उन्हें भारत की भूमि और परम्पराओं से कोई लगाव नहीं था। जिस प्रकार औरंगजेब ने अपने पूर्वजों के अनुकरण पर अपने भाइयों की हत्या करके साम्राज्य प्राप्त किया था उसी मार्ग का अनुसरण उसके पुत्रों और पौत्रों ने किया। औरंगजेब के पश्चात् 50 वर्षों से कम समय में दिल्ली की गद्दी पर आठ शासक आसीन हुए। सबसे पहले औरंगजेब के बड़े पुत्र बहादुरशाह प्रथम अपने भाइयों को मारकर साम्राज्य पर अधिकार किया। बहादुरशाह के पुत्रों में जहाँदारशाह सफल हुआ लेकिन दस माह पश्चात् अमीरों के दुसरे गुट ने अजीम-उस-शान ने के पुत्र फर्रुखसीयर को सम्राट बना दिया। इसके बाद मुहम्मदशाह, अहमदशाह और आलमगीरे द्वितीय किसी में भी इतनी सामर्थ्य नहीं थी कि मुगल साम्राज्य के पतन को रोक पाते। वस्तुतः अमीरों की बढ़ती हुई शक्ति ने ही मुगल साम्राज्य के पतन को सत्य किया।
जिस प्रकार इस युग के पूर्व की शताब्दी का केन्द्रीय पुरुष अकबर था उसी प्रकार इस युग (1556-1761) का केन्द्रीय पुरुष था औरंगजेब। पहले पुरुष ने मुगल साम्राज्य को गौरव प्रदान किया तो दूसरे ने उसके पतन का मार्ग प्रशस्त किया। औरंगजेब एक कट्टर मुसलमान था। उसकी जातीयता और धर्म नीति ने अकबर के आदर्शों और ‘सुलहकुल’ की नीति की इतिश्री कर दी। हिन्दुओं पर पुनः अत्याचार किए जाने लगे और मन्दिरों के विनाश के फरमान निकलने लगे। मुगल नीति पर क्रमशः भारतीय मुसलमान, ईरानी और तूरानी अमीरों का वर्चस्व स्थापित हो गया। ऐसी स्थिति में किसी भी सांस्कृतिक उन्मेष की आशा करना व्यर्थ था। इसी समय मराठों का भी उत्कर्ष हुआ जिनके छापामार युद्धों ने औरंगजेब की नींद उड़ा दी। औरंगजेब बहुत शंकालु प्रकृति का था इसलिए 25 वर्ष तक दक्षिण में युद्ध करने पर भी उसकी उपलब्धि शून्य रही। उसकी राजपूत नीति में भी सफल नहीं हो पाई। अपने अन्तिम समय में स्वयं औरंगजेब को अपने उत्तराधिकारियों से कोई विशेष आशा नहीं थी। निश्चय ही मुगलों ने स्वयं अपने साम्राज्य को विघटन की दिशा प्रदान की।
| Weight | 650 g |
|---|---|
| Dimensions | 22.5 × 14.5 × 2.5 cm |









कथक नृत्य परंपरा
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