कविताभर एक उम्र
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Kavitabhar ek Umra कविता आदमी का आदिम राग है, अभिव्यक्ति की सबसे महत्वपूर्ण और सूक्ष्म विधा है। हेतु भारद्वाज की यह पुस्तक कविता के अनुशासन, रचनाकार के श्रम, और उसके स्थापत्य पर गहन विचार प्रस्तुत करती है। यह कृति बताती है कि कविता किसी जीवन-स्थिति में पाठक को रागात्मक रूप से भागीदार बनाकर उसे किसी जीवन-मूल्य से जोड़ती है, और संवेदना उसका मूल तथा जीवन-मूल्य उसका नतीजा होना चाहिए।
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कविता आदमी का आदिम राग है। मनुष्य के विकास के साथ-साथ जब हम साहित्य के समानान्तर विकास को देखते हैं तो हमें कवि पहले और दार्शनिक बाद में दिखायी देता है। कविता अभिव्यक्ति की सबसे महत्वपूर्ण, सूक्ष्म तथा केन्द्रीय विधा है। यदि ऐसा न होता तो विश्व की हर भाषा के साहित्य का इतिहास कविता से (वह भी लयात्मक कविता) प्रारम्भ न होता। भाषा का पद्य से गद्य की ओर विकास- प्रवाह इस बात को प्रमाणित करता है कि आदमी के मन की बुनियादी बनावट लयात्मक है। साहित्य के जो रूप शब्द से सम्बद्ध हैं, उनमें कविता का अनुशासन सबसे गम्भीर, बारीक और श्रमसाध्य होता है। कविता ही वह विधा है जिसमें रचनाकार को न तो एक भी शब्द के अपव्यय की छूट है और न एक भी शब्द के गलत प्रयोग की। इसलिए कवि-कर्म बहुत सरल भी नहीं है।…
कविता के स्थापत्य पर बात करने से पहले हमें एक बात साफ तौर से समझ लेनी चाहिए कि कोई रचना कविता कब होती है? और उसके स्थापत्य पर तभी बात हो सकती है जब वह कविता हो। कविता की अन्तिम तथा मुकम्मल परिभाषा देना तो कठिन काम है किन्तु यह तय है कि कविता किसी जीवन-स्थिति में पाठक को रागात्मक रूप से भागीदार बनाकर उसे किसी जीवन-मूल्य से जोड़ती है। कविता के लिये संवेदना उसका मूल तथा जीवन- मूल्य उसका नतीजा होना चाहिये।…
शेष अगले फ्लैप पर…
| Weight | 240 g |
|---|---|
| Dimensions | 22.5 × 14.5 × 1 cm |
| Genre |















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