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हिन्दी शोध-तन्त्र की रूपरेखा

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विश्वविद्यालय की स्थापना जिन कार्यों के निष्पादन के लिए होती है, उनमें शोध कार्य कराना उसका सबसे महत्त्पूर्ण कार्य होता है। शोध का मूल अर्थ है-ज्ञान के उस अनुषंग को प्रकाश में लाना जिसके विषय में हम अभी तक अभिज्ञ हैं। संसार का सारा वैज्ञानिक तथा ज्ञानात्मक विकास मनुष्य के शोध कार्यों का ही परिणाम है। विश्वविद्यालय के विभिन्न विभाग अपने-अपने विषय में शोध कराते हैं। इस तरह वे अपने क्षेत्र की ज्ञान सम्पदा को प्रकाश में लाते हैं और इस दिशा में आगे की पीढ़ी का मार्ग प्रशस्त करते हैं।

शोध एक वैज्ञानिक और वैधानिक प्रक्रिया है जो सतत् साधना, योजनाबद्ध कार्य तथा एक सुनिश्चित विधान की अपेक्षा रखती है। हिन्दी में शोध कार्य का इतिहास बहुत पुराना नहीं है तथा देश-विदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों के हिन्दी तथा भाषा विभागों में लम्बे अरसे से शोध कार्य हो रहे हैं।

शोध कार्यों की परम्परा-समृद्धि के साथ-साथ हिन्दी में शोध-प्रविधि पर सैद्धान्तिक ग्रन्थों का प्रणयन भी होता रहा है। विकास की इस प्रक्रिया में शोध का शास्त्र ही विकसित हो गया है। डॉ. मनमोहन सहगल की प्रस्तुत कृति हिन्दी में शोध-तंत्र के सैद्धान्तिक और व्यावहारिक पक्षों का गम्भीर और विशद् आख्यान करती है। पुस्तक के सैद्धान्तिक विवेचन में विद्वान लेखक ने शोध की परिभाषा, शोध के प्रकार, पाठ-शोध विधि, शोध की पद्धतियाँ आदि का विस्तृत विवेचन किया है तो द्वितीय खण्ड में शोध के व्यावहारिक पक्षों का सम्यक् उद्घाटन किया गया है। शोध-शास्त्र को समझने तथा शोधकर्ताओं के लिए यह एक अपरिहार्य पुस्तक है।

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विषय-सूची

प्रथम खण्ड
सैद्धान्तिक पक्ष

1. अनुसंधान
(क) अनुसंधान का स्वरूप, (ख) अनुसंधान का प्रयोजन, (ग) अनुसंधान में तथ्यों का उपयोग, (घ) अनुसंधान तथा समालोचना।

2. अनुसंधान के प्रकार
(क) शुद्ध साहित्यिक शोध, (ख) अन्तरविधावर्ती शोध,
(क-i) साहित्यिक शोध, (क-ii) भाषावैज्ञानिक शोध, (क-iii) भाषा सर्वेक्षण की विधि, (क-iv) काव्य-शास्त्रीय शोध, (क-v) साहित्येतिहास सम्बन्धी शोध, (क-vi) तुलनात्मक साहित्यिक शोध, (क-vii) लोक-साहित्य सम्बन्धी शोध।
(ख-i) साहित्य की समाज-शास्त्रीय शोध, (ख-ii) साहित्य की मनोवैज्ञानिक शोध, (ख-iii) साहित्य की सौन्दर्यशास्त्रीय शोध, (ख-iv) साहित्य की ऐतिहासिक शोध।

3. पाठ-शोध की विधि (पाठालोचन)
(i) प्रकाशित ग्रन्थों का पाठ-निर्धारण, (ii) अप्रकाशित ग्रन्थों का पाठ निर्धारण, (iii) पाण्डुलिपियों में विकृतियों के कारण तथा उनका वर्गीकरण, (iv) पाण्डुलिपियों की विभिन्न उपलब्ध प्रतिलिपियों को मिलाने का ढंग।

4. शोध की विभिन्न पद्धतियाँ
आलोचनात्मक, शास्त्रीय, भाषा-वैज्ञानिक और शैली वैज्ञानिक, मनोवैज्ञानिक, सर्वेक्षण, समस्यामूलक, क्षेत्रीय, आगमन-निगमन वैज्ञानिक पद्धति-मूल तत्त्व, व्यक्तिपरक गुण, वैज्ञानिक पद्धति के सोपान। अनुभवाश्रित पद्धति-विशेषताएँ, सीमाएँ और सम्भावनाएँ। सामाजिक पद्धति-मूल अर्थ, मुख्य संघटक, मूल उद्देश्य, विधियाँ, सीमाएँ।

5. शोध की प्रायोगिक विधियाँ (शोध-सामग्री संकलनार्थ)
(क) प्रश्नावली विधि, (ख) साक्षात्कार विधि।

6. शोध के विविध आयाम/पक्ष
(i) विविध पक्ष, (ii) आयाम, (iii) हिन्दी साहित्यिक शोध-कार्य की उपलब्धि, (iv) शोध-प्रबन्धों की वर्तमान स्थिति, (v) शोध प्रबन्धों से इतर शोधात्मक समीक्षा-ग्रन्थों की स्थिति।

7. शोध विषय : समस्याएँ-समाधान
हिन्दी शोध-सम्भावनाएँ।

द्वितीय खण्ड
व्यावहारिक पक्ष

8. साहित्यिक शोध के पारिभाषिक
(क) सिद्धान्तपरक पारिभाषिक तथ्य, अवधारणा, प्राक्कल्पना, सिद्धान्त। (ख) पद्धतिपरक पारिभाषिक- आगमन, विश्लेषण, सर्वेक्षण, मूल्यांकन, पुनर्मूल्यांकन। (ग) प्रस्तुतिपरकता सम्बन्धी पारिभाषिक – वर्गीकरण, शोध-प्रबन्ध, अनुबन्ध, आवधिक-पत्र। (घ) व्यक्तिपरक पारिभाषिक – शोधार्थी, निर्देशक, परीक्षक।

9. शोध के निमित्त
(क) शोधार्थी-व्यक्तित्वपरक गुण, व्यावहारिक गुण, योग्यतापरक गुण। (ख) निर्देशक- व्यक्तित्वपरक गुण, व्यावहारिक गुण, योग्यतापरक गुण। (ग) निर्देशन के सिद्धान्त।

10. विषय-चयन तथा शोध-प्रविधि
(i) विषय-चयन, (ii) संभाव्य शोध-विषय, (iii) विषय की रूपरेखा/ अध्ययन योजना, (iv) रूपरेखा बनाने की वैज्ञानिक विधि, (v) सामग्री संकलन, (vi) संकलित सामग्री का उपयोग।

11. शोध-प्रबन्ध-लेखन
(क) शोध-प्रबन्ध की आंगिक व्यवस्था, (ख) सामग्री का विभाजन तथा संयोजन, (ग) उद्धरण तथा संदर्भोल्लेख की पद्धति, (घ) उपसंहार एवं उपलब्धि, (ङ) परिशिष्ट, (च) अनुक्रमणिकाएँ, (छ) शोध-प्रबन्ध के दोष और उनका निराकरण।

12. प्रबन्ध-परीक्षण तथा मौखिकी
(i) परीक्षक, (ii) परीक्षण, परीक्षक प्रतिवेदन, सुझाव और पुनर्लेखन, (iii) मौखिकी : मौखिकी में पूछे जाने वाले सम्भावित प्रश्न।

Weight 180 g
Dimensions 22.5 × 14.5 × 1.5 cm

About the Author

डॉ. मनमोहन सेहगल

डॉ. मनमोहन सहगल हिन्दी साहित्य के प्रतिष्ठित विद्वान, शोधकर्ता, समीक्षक एवं उपन्यासकार रहे हैं। उनका जन्म 15 अप्रैल 1932 को हुआ। उन्होंने हिन्दी एवं दर्शनशास्त्र में एम.ए. तथा पीएच.डी. एवं डी.लिट्. की उपाधियाँ प्राप्त कीं। अध्ययन, अध्यापन, शोध एवं सृजन…

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