गोपाल कृष्ण गोखले : जीवन और दर्शन
Original price was: ₹200.00.₹160.00Current price is: ₹160.00.
You Save 20%
In stock
स्वतन्त्रता आन्दोलन के दौरान जिन नेताओं का व्यक्तित्व पूरी प्रखरता से उभरा तथा जो आगे आने वाली पीढ़ी के लिए अनुकरणीय बने, उनमें गोपाल कृष्ण गोखले का नाम अग्रणी था। यद्यपि वे काँग्रेस के उदारवादी नेता थे तथापि ‘वे आधुनिक भारत के प्रथम कूटनीतिज्ञ थे।’ गोखले के विषय में के. एम. पन्निकर की यह उक्ति सर्वथा संगत है क्योंकि उनका उदारवाद राष्ट्रीयता की भावना से ओतप्रोत था।
गोखले का व्यक्तित्व बहुआयामी था- विलक्षण प्रतिभा के धनी, शिक्षाविद् एवं शिक्षक, मौलिक विचारक, राजनयिक, अर्थशास्त्री एवं इतिहासविद्। वे जीवन में शिक्षा का महत्त्व समझते थे और भारत की शिक्षा-व्यवस्था को लेकर चिन्तित ही नहीं उसको सुधारने के लिए सक्रिय भी रहे। अनुशासित तथा सिद्धान्तवादी शिक्षक के रूप में उन्होंने प्रतिष्ठा प्राप्त की। शिक्षण कार्य को उन्होंने समाज सेवा मानकर किया तथा राजनीति में उतरने के बाद भी समाज-सेवा से विरत नहीं हुए। वे समाज के बीच में जाकर कार्य करते थे और उसी के लिए उन्होंने भारत सेवक समाज की स्थापना की। भारत सेवक समाज के माध्यम से उन्होंने दलितोत्थान का कार्य पूरी तल्लीनता से किया।
वे एक कुशल और व्यावहारिक राजनीतिज्ञ थे। उन्होंने स्वतन्त्रता आन्दोलन में भाग लिया साथ ही बौद्धिक रूप से ब्रिटिश सरकार की नीतियों की तीखी आलोचना की। प्रशासन में विकेन्द्रीकरण द्वारा अँग्रेजों से सत्ता छीनने का तरीका गोखले ने ही प्रतिपादित किया। गोखले की दृष्टि में राष्ट्रीय एकता के लिए हिन्दू-मुस्लिम एकता आधारभूत तत्त्व थी। उन्होंने राष्ट्रीय एकता के लिए महत्त्वपूर्ण कार्य किया।
स्वयं गाँधीजी की गोखले में बहुत आस्था थी। दुर्गादास ने ठीक ही लिखा है कि ‘गोखले स्वयं एक महामानव थे, लेकिन उनकी प्रसिद्धि किसी सीमा तक इस कारण भी है कि गाँधी ने कई बार उन्हें अपना शिक्षक और राजनीतिक गुरु स्वीकार किया था।’
गोपीनाथ कालभोर द्वारा श्रमपूर्वक लिखी गयी यह पुस्तक गोपाल कृष्ण गोखले के बहुआयामी व्यक्तित्व, उनकी उपलब्धियों तथा उनके जीवन-दर्शन का सरस तथा प्रभावी विश्लेषण करती है।
| Weight | 285 g |
|---|---|
| Dimensions | 22.5 × 14.5 × 1.5 cm |





मदन मोहन मालवीय: व्यक्तित्व एवं कृतित्व
प्रबन्धकीय अर्थशास्त्र
उपभोक्ता का अर्थशास्त्र एवं उपभोक्ता संरक्षण
चरणं शरणं गच्छामि
विनोबा भावे सामाजिक-राजनीतिक चिन्तन
कथा साहित्य
वस्त्र विज्ञान एवम् परिधान निर्माण
मानव भूगोल
भूमि सुधार एवं भूमि प्रशासनिक व्यवस्था
मानसरोवर (भाग-8)
महात्मा गांधी: जीवन और दर्शन
भारतीय समाज में नारी
गांधी अवधारणा में नई तालीम
Khayal...
भारत का इतिहस :प्रागैतिहासिक काल से 1200 ईस्वी तक
नूतन हिंदी व्याकरण
राजस्थान के इतिहास की रूपरेखा
कला के सिद्धांत एवं अंतरिक्ष गृह सज्जा
सागरों, महासागरों और नदियों की रोचक मछलियाँ
हर्ष सतसई
मानसरोवर (भाग-4)
हिंदी व्याकरण
लोक वित्त
आधुनिक भारत का इतिहास (1756-1858 ई.)
समय प्रबंध एवं कार्य सरलीकरण
मिले सुर मेरा तुम्हारा
ग्रामीण समाजशास्त्र
अभिनव हिंदी व्याकरण
हिंदी नाटक एवं रंगमंच
पंचतंत्र की कहानियाँ
इंटरनेट और पुस्तकालय
संस्कृत व्याकरण एवं निबन्ध रचना
राजस्थान का भूगोल
भौतिक विज्ञान
भारत का इतिहास (1000 से 1707 ई.)
सुदामाचरित
Reviews
There are no reviews yet.