फ़िल्में और प्रचार: तब से अब तक
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फिल्मों की लोकप्रियता और प्रचार के विभिन्न माध्यमों का विस्तृत विश्लेषण। यह पुस्तक फिल्म निर्माण से लेकर दर्शकों तक पहुँचने के सफर को उजागर करती है, जिसमें प्रचार की भूमिका, बदलती तकनीकें और हिट फिल्मों की सूची शामिल है।
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फिल्मों की लोकप्रियता में किसी को संदेह नहीं है। छोटे से लेकर बड़े तक सभी फिल्मों के प्रति आकर्षित रहते हैं। शहर छोटा हो या बड़ा, वहाँ सिनेमाघर अवश्य होते हैं। अब तो पुराने सिनेमाघरों के स्थान पर सिनेप्लैक्स बन गए हैं। इस सब बदलाव के बावजूद फिल्म दर्शकों की संख्या निरंतर बढ़ ही रही है। फिल्मों को यदि समाज का अभिन्न अंग कहा जाए, तो गलत नहीं होगा। फिल्मों के दर्शकों में कुछ ऐसे भी हैं, जो एक फिल्म को कई-कई बार देखते हैं। यही नहीं, फिल्में देखने के साथ- साथ लोग फिल्म कलाकारों के बारे में भी जानना- पढ़ना चाहते हैं। दर्शकों-पाठकों की इसी मानसिकता का लाभ उठाकर अनेक टीवी चैनल फिल्मों व फिल्म कलाकारों के बारे में तमाम कार्यक्रम दिखाते रहते हैं। फिल्मों से संबंधित यह सारे कार्यक्रम वास्तव में फिल्मों के प्रचार का हिस्सा होते हैं। कई बार तो फिल्मों को लेकर ऐसी-ऐसी खबरें देखने, सुनने व पढ़ने को मिलती हैं, वह विश्वास के लायक नहीं होतीं, फिर भी कुछ लोग उन पर विश्वास करते हैं, या ये कह लीजिए कि विश्वास करना पड़ता है।
फिल्मों के प्रचार का यह सिलसिला फिल्मों के निर्माण के साथ ही शुरू हो गया था। पर उस समय प्रचार का रूप यह नहीं था, क्योंकि उस समय प्रचार के इतने साधन नहीं थे। इस बात में तो संदेह नहीं है कि फिल्में प्रचार के बल पर ही सफल हो पाती हैं। जिस फिल्म का जितना अधिक प्रचार होता है, वह उतनी ही सफल होती है। इसलिए निर्माता- निर्देशक का हमेशा यह प्रयास रहता है कि फिल्मों का अधिक से अधिक प्रचार किया जाए। इसके लिए वह प्रचार का हर तरीका अपनाते हैं। यही कारण है कि फिल्मों के निर्माण का बजट पहले की तुलना में अब कई गुना बढ़ गया है। फिल्म प्रचार के तरीके कौन-कौन से हैं, पुस्तक में उन्हीं के बारे में विस्तार से बताया गया है। पहले की तुलना में आज फिल्म प्रचार के साधन बढ़ गए हैं, उन सभी का समावेश पुस्तक में किया गया है। प्रचार के साधनों के साथ-साथ फिल्मों व फिल्म कलाकारों के बारे में भी पुस्तक में रोचक जानकारी दी गई है। अब तक की सुपर हिट फिल्मों की सूची भी पुस्तक में है।
| Weight | 315 g |
|---|---|
| Dimensions | 22.5 × 14.5 × 1 cm |
| Genre |




हिंदी भाषा, व्याकरण और संप्रेषण
Lok Sahitya
Rekhachitra Tatha Sansmaran
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