फर्जी से पैदा भयो
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Farji Se Paida Bhayo शंकर पुणतांबेकर व्यंग्य साहित्य के बुजुर्ग नामों में से एक हैं, जिन्होंने व्यंग्य को एक विधा माना और उसकी स्थापना में विवेचनात्मक आलेख प्रस्तुत किए। ‘फर्जी से पैदा भयो’ एक विशिष्ट व्यंग्य-संकलन है, जिसमें ‘अमृतसर की गलियों के ताँगेवालों की ज़बान’ की तरह महीन मार है। यह कृति विडम्बना को विदग्धता से प्रस्तुत करती है, जिससे विक्षोभ उत्पन्न होता है, और लेखक की सिद्धहस्त चतुर बयानी में से अपने आप उत्पन्न होने वाली सरसता और रोचकता है।
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शंकर पुणतांबेकर व्यंग्य साहित्य के बुजुर्ग नामों में से एक हैं। वे ऐसे लेखक हैं जिन्होंने व्यंग्य को विधा माना और उसकी स्थापना में खासे विवेचनात्मक आलेख प्रस्तुत किये।
लेखक ने व्यंग्य को उसके सही परिप्रेक्ष्य में पकड़ा है। उसके विचार में व्यंग्य विडम्बना को विदग्धता से ऐसे प्रस्तुत करता है कि परिणामस्वरूप उससे विक्षोभ उत्पन्न हो। विक्षोभ गंभीर और वैचारिक । जिसे क्लास व्यंग्य कहा जाता है यह पुणतांबेकर के समस्त लेखन में विद्यमान है, पूरी सरसता और रोचकता के साथ जो उनकी सिद्धहस्त चतुर बयानी में से अपने आप उत्पन्न होती है।
पुणतांबेकर को पढ़ना वर्तमान जीवन की विभिन्न विरूपताओं-विसंगतियों में से गुजरना है। साथ ही इस बात से भी परिचित होना है कि आज पद्य के कवि गद्य की भाषा के आयाम भी कितने व्यापक हुए हैं-यह कितनी सशक्त बनी है। प्रस्तुत संग्रह का शीर्ष व्यंग्य का स्वरूप जताता है।
संग्रह की भूमिका सुधी विवेचकों को व्यंग्य सम्बन्धी नयी विचार-सामग्री देगी।
| Weight | 510 g |
|---|---|
| Dimensions | 22.5 × 14.5 × 2.5 cm |
| Genre |




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