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भौतिक भूगोल

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  • यह पुस्तक राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर तथा बृज विश्वविद्यालय, भरतपुर के सेमेस्टर 1 (भूगोल) के नवीनतम पाठ्यक्रम पर आधारित है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुरूप तैयार की गई यह पुस्तक विद्यार्थियों को सरल भाषा में स्पष्ट, संगठित एवं परीक्षा-केंद्रित अध्ययन सामग्री प्रदान करती है।

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विषय-सूची

(Contents)

  1. भौतिक भूगोल : परिभाषा, विषय क्षेत्र एवं ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
    (Physical Geography: Definition, Scope and Historical Background)

परिचय; भौतिक भूगोल परिभाषा; भौतिक भूगोल का क्षेत्र; आधारभूत तथ्य; भौतिक भूगोल की प्रमुख शाखाएँ; भौतिक भूगोल के विकास की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि; चिरसम्मत काल; अन्ध युग; खोज का महान युग; महान अन्वेषक; 19वीं शताब्दी में भौतिक भूगोल; 20वीं शताब्दी-भौतिक भूगोल का स्वर्णिम युग।

  1. पृथ्वी की उत्पत्ति
    (Origin of the Earth)

कान्ट की वायव्य-राशि परिकल्पना; लाप्लेस की नीहारिका परिकल्पना; जीन्स तथा जैफ्रे की ज्वारीय परिकल्पना; ऑटो शिमिट की अन्तरातारक धूल परिकल्पना; महाविस्फोट अथवा बिग बैंग सिद्धान्त; बिग बैंग सिद्धान्त के पक्ष में प्रमाण; विपक्ष में प्रमाण।

  1. पृथ्वी का भू-गर्भीय इतिहास
    (Geological History of the Earth)

पृथ्वी की आयुः भू-वैज्ञानिक युगों का आधार; पृथ्वी का भूगर्भिक इतिहास; भू-गर्भिक समय मापक; ऊषः या आद्य कल्प; पुराजीव कल्प; मध्यजीव कल्प; नवजीव कल्प; नूतन काल।

  1. वेगनर का महाद्वीपीय प्रवाह सिद्धान्त
    (Wegener’s Theory of Continental Drift)

वेगनर का महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धान्त; महाद्वीपों के विस्थापन की दिशा एवं बल; प्रवाह की दिशा; प्रवाह के लिए बल; सिद्धान्त के पक्ष में प्रमाण; पैंजिया का टूटना (विस्थापन); पर्वतों का निर्माण।

  1. प्लेट विवर्तनिकी सिद्धान्त
    (Plate Tectonic Theory)

प्लेट विवर्तनिकी क्या है?; प्लेट विवर्तनिकी का अर्थ; पुराचुम्बकत्व; चुम्बकत्व का स्रोत; पुराचुम्बकीय ध्रुवों का विचलन; प्लेट विवर्तन सिद्धान्त; प्लेट गति; प्लेट विवर्तनिक साध्य के पक्ष में प्रमाण।

  1. भू-अभ्यान्तर
    (Interior of the Earth)

अप्राकृतिक आधार; पृथ्वी की उत्पत्ति सम्बन्धी सिद्धान्तों के आधार पर; प्राकृतिक आधार; पृथ्वी के आन्तरिक भाग में शैल तथा खनिज; पृथ्वी का रासायनिक संघटन और विभिन्न आवरण; पृथ्वी की विभिन्न परतों की मोटाई तथा गहराई।

  1. धरातलीय गतियाँ : पर्वत संचलन एवं महादेश जनक
    (Earth Movements; Orogenic and Epeirogenic)

आन्तरिक शक्तियाँ; धरातलीय गतियों के प्रकार; भूपटलीय भ्रंश; भ्रंश द्वारा स्थलाकृतियों का विकास; भूपटलीय वलन; वलनों के प्रकार।

  1. समस्थिति सिद्धान्त
    (Theory of Isostasy)

सन्तुलन सिद्धान्त का प्रतिपादन; भू-सन्तुलन के सम्बन्ध में प्राट की धारणा; जार्ज एअरी की धारणा; विश्व में भू-पृष्ठीय सन्तुलन की व्यवस्था; हेफोर्ड तथा बोवी की धारणा; जोली की धारणा; होम्स की धारणा।

  1. ज्वालामुखी : कारण व स्थलाकृतियाँ
    (Vulcanocity: Causes and Landforms)

ज्वालामुखी क्या है?; ज्वालामुखी क्रिया; ज्वालामुखी क्रिया के कारण; ज्वालामुखी से निकलने वाले पदार्थ; ज्वालामुखी उभेदन के प्रकार; उद्भदन की विशेषताओं पर आधारित वर्गीकरण; ज्वालामुखी का वर्गीकरण; ज्वालामुखी क्रिया से बनी स्थलाकृतियाँ; गीज़र या उष्णोत्स; धूमछिद्र; पंक ज्वालामुखी; विश्व के प्रमुख ज्वालामुखी।

  1. भूकम्प : कारण व वितरण
    (Earthquake: Causes and Distribution)

भूकम्प का अर्थ; भूकम्प की उत्पत्ति के कारण; भूकम्प की तरंगें; भूकम्प की माप; भूकम्प का वर्गीकरण; भूकम्प क्षेत्र; भूकम्प का प्रभाव।

  1. पर्वत निर्माण के सिद्धान्त
    (Theories of Mountain Building)

परिचय; पर्वतों का वर्गीकरण; पर्वत निर्माणकारी सिद्धान्त; कोबर का भू-सन्नति सिद्धान्त; आर्थर होम्स का संवहन धारा सिद्धान्त।

  1. शैलों की उत्पत्ति एवं संरचना
    (Origin and Composition of Rocks)

शैलों का वर्गीकरण; आग्नेय शैल; आग्नेय शैलों का वर्गीकरण; आग्नेय चट्टानों की प्रमुख विशेषताएँ; आग्नये शैलों का महत्त्व; अवसादी या तलछटी चट्टानें; अवसादी शैलों का वर्गीकरण; अवसादी शैलों की प्रमुख विशेषताएँ; अवसादी शैलों का आर्थिक महत्त्व; कायान्तरित चट्टानें; कायान्तरण के कारण; कायान्तरित चट्टानों का वर्गीकरण; कायान्तरित शैलों का महत्त्व।

  1. अपक्षयण
    (Weathering)

अपक्षयण का अर्थ; अपक्षयण को नियन्त्रित करने वाले कारक; अपक्षयण के प्रकार; जैविकीय अपक्षयण।

  1. अपरदन चक्र की संकल्पना
    (The Concept of Cycle of Erosion)

परिभाषाएँ; अपरदन चक्र की प्रक्रिया; उत्थान एवं अपरदन चक्र; उत्थान तथा अपरदन; डेविस की अपरदन चक्र या भौगोलिक चक्र की संकल्पना; डेविस के अपरदन चक्र का आरेखीय प्रदर्शन; डेविस के मत की समालोचना; पैंक की भ्वाकृतिक तंत्र तथा अपरदन चक्र की विचारधारा; पैंक के अपरदन चक्र का ग्राफ द्वारा प्रदर्शन; पैंक की मत की समालोचना।

  1. अपवाह प्रणाली का उद्भव एवं विकास
    (Origin and Development of Drainage System)

क्रमवर्ती प्रवाह; अपवाह प्रतिरूप; द्रुमाकृतिक या वृक्षाकार प्रतिरूप; आयताकार प्रतिरूप; अपकेन्द्रीय या अरीय प्रतिरूप; अभिकेन्द्रिय अथवा आंतरिक अपवाह प्रतिरूप; वलयाकार अपवाह प्रतिरूप; कंटकीय अथवा हुकनुमा अपवाह प्रतिरूप; पंखाकार अपवाह प्रतिरूप; हेरिंग अस्थि अपवाह प्रतिरूप; आन्तरायिक/प्रच्छन्न अपवाह प्रतिरूप।

  1. नदी के कार्य एवं स्थलाकृतियाँ
    (The Work of River and Fluvial Landscapes)

नदियों का भौतिक स्वरूप; नदी के कार्य; अपरदन द्वारा निर्मित भू-आकृतियाँ; जल प्रपात; नदी का परिवहन कार्य; नदी का निक्षेपण कार्य; आकृति के अनुसार डेल्टाओं का वर्गीकरण; नदी अपहरण; नदी अपहरण के लिए आवश्यक दशाएँ; नदी अपहरण के रूप; भूमिगत जल को प्रभावित करने वाले कारक।

  1. भूमिगत जल का कार्य एवं कार्स्ट स्थलाकृतियाँ
    (The Work of Underground Water and Karst Landforms)

भूमिगत जल का संचयन; जल कूप या पाताल तोड़ कुएँ; स्रोते; स्रोतों के प्रकार; गीजर; कार्स्ट स्थलाकृतियाँ; चूनायुक्त प्रदेश; अपरदनात्मक कार्य द्वारा विकसित कार्स्ट स्थलाकृतियाँ; परिवहन कार्य द्वारा विकसित कार्स्ट स्थलाकृति; निक्षेपण कार्य द्वारा विकसित कार्स्ट स्थलाकृति; हिमानी या हिमनद की उत्पत्ति एवं हिम रेखा।

  1. हिमानी के कार्य एवं हिमानीकृत स्थलाकृतियाँ
    (The Work of Glaciers and Glaciated Landforms)

हिमानी के प्रकार; हिमानियों की गति; हिमानी के कार्य; हिमानी अपरदन; परिवहन कार्य; निक्षेपण कार्य; हिमानीकृत स्थलाकृतियाँ; अपरदनात्मक स्थलरूप; हिमानी के निक्षेपण कार्य से बनी स्थलाकृतियाँ; विभिन्न प्रकार के मोरेन या हिमोढ़; ड्रमलिन या हिम नदोढ़; सुदूर फैले या विस्थापित शिलाखण्ड; विषम स्थिति के हिमोढ़; एस्कर या मिट्टी के मार्ग; केम; केतलीनुमा जमाव; हिमनदी की परिवहन क्रिया; हिमनदी की निक्षेप प्रक्रिया; हिमानी-जलोढ़ निक्षेप; हवा का अपरदन कार्य।

  1. पवन के कार्य एवं शुष्क प्रदेश स्थलाकृतियाँ
    (The Work of Wind and Aeolian Landforms)

हवा द्वारा निर्मित भू-आकृतियाँ; हवा द्वारा परिवहन कार्य; हवा द्वारा निक्षेपण कार्य; बालुका स्तूप; बालुका स्तूपों की रचना; बालुका स्तूपों के प्रकार; लोयस; मरुस्थलीय भागों में जलीय स्थलाकृतियाँ; सागरीय तट तथा किनारा; सागरीय अपरदन।

  1. समुद्रतटीय लहरों के कार्य एवं स्थलाकृतियाँ
    (The Work of Sea Waves and Coastal Landforms)

तट के प्रकार; तट रेखा और उसके प्रकार; अपरदनात्मक स्थलाकृतियाँ; निक्षेपात्मक स्थलाकृति।

Weight305 g
Dimensions24 × 15.5 × 1 cm
पाठ्यक्रम प्रणाली

विश्वविद्यालय

,

Semester / Year

,

Textbook Genre

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About the Authors

प्रो. बी.एल. शर्मा

प्रो. बी.एल. शर्मा अंतरराष्ट्रीय ख्याति-प्राप्त भूगोलवेत्ता एवं एम.एस.जे. राजकीय महाविद्यालय, भरतपुर के सेवानिवृत्त उपाचार्य हैं। इन्हें 35 वर्षों का अध्यापन अनुभव प्राप्त है। इन्होंने सन् 1984 में पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त की। कृषि भूगोल, भौतिक भूगोल, मानव भूगोल, पर्यावरण भूगोल…

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प्रो. पलक भारद्वाज

प्रो. पलक भारद्वाज वर्तमान में राजकीय महाविद्यालय, वल्लभनगर (उदयपुर) में प्राचार्य के पद पर कार्यरत हैं। इन्हें 28 वर्षों का अध्यापन अनुभव प्राप्त है। इन्होंने सन् 1992 में महार्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय से पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त की। पर्यावरण भूगोल…

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प्रो. सुनील कुमार शर्मा

प्रो. सुनील कुमार शर्मा भूगोल विभाग, सम्राट पृथ्वीराज चौहान राजकीय महाविद्यालय, अजमेर में प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं। इन्हें 25 वर्षों का अध्यापन अनुभव प्राप्त है। इन्होंने एम.फिल. एवं पीएच.डी. की उपाधियाँ प्राप्त की हैं। औद्योगिक भूगोल, जनसंख्या भूगोल…

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