भारत में पंचायती राज निवार्चन
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Bharat me Panchayat Raj Nivarchan प्रजातंत्र के प्रासाद की नींव सार्वजनिक संस्थानों के नियमित और निष्पक्ष चुनावों पर टिकी है। प्रो. पी.सी. माथुर और प्रो. रवीन्द्र शर्मा द्वारा संपादित यह कृति पंचायती राज संस्थाओं में निर्वाचन की अवधारणा, निर्वाचन प्रणाली, और विभिन्न राज्यों में इसके विश्लेषण पर केंद्रित है, जो शोधार्थियों, शोध निदेशकों और पंचायती राज में रुचि रखने वाले विद्वानों के लिए एक संपूर्ण पुस्तक है।
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प्रजातंत्र के प्रासाद की नींव सार्वजनिक संस्थानों के नियमित और निष्पक्ष चुनावों पर टिकी है। हमारे देश में सभी निकायों का गठन चुनावों द्वारा होता है। भारतीय प्रजातंत्र को मजबूत करने वाली संस्थाओं में पंचायती राज संस्थाओं का बहुत बड़ा योगदान है। किन्तु यह चिन्ता का विषय है कि पंचायत राज संस्थाओं की निर्वाचन प्रणाली पर अभी तक गम्भीरता और वस्तुपरकता से विचार नहीं हुआ है। प्रस्तुत कृति इस बड़े अभाव की पूर्ति का एक विनम्र प्रयास है।
इस कृति में पंचायत राज संस्थाओं में निर्वाचन की अवधारणा, निर्वाचन प्रणाली, पंचायती राज निर्वाचन के कारक, राजस्थान राज्य में पंचायती राज संस्थाओं का निर्वाचन, बिहार, पंजाब, उत्तर प्रदेश आदि अन्य राज्यों में पंचायती राज संस्थाओं का निर्वाचन जैसे विषयों का विश्लेषण है। छः खण्डों में प्रस्तुत इस पुस्तक में पंचायती राज के कतिपय महत्त्वपूर्ण प्रतिवेदनों का समावेश भी है।
सम्पादकों का प्रयास रहा है कि कृति में पंचायती राज संस्थाओं से सम्बद्ध विषयों के अधिकारी विद्वानों के आलेख ही सम्मिलित हों, ताकि इस विषय पर एक सम्पूर्ण पुस्तक शोधार्थियों, शोध निदेशकों तथा अन्य पाठकों को मिल सके। जितने भी आलेख इस पुस्तक में सम्मिलित हैं वे अपने उपविषय के प्रति पूर्ण न्याय करते हैं तथा उस पर विश्वसनीय सामग्री प्रस्तुत करते हैं। इस कृति में उन लेखकों के आलेख भी सम्मिलित हैं जो विभिन्न राज्यों में निर्वाचन आयोग से सम्बद्ध रह चुके हैं।
| Weight | 570 g |
|---|---|
| Dimensions | 22.5 × 14.5 × 2.5 cm |
| Genre | |
| Textbook Genre |





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