Aurangzebnama
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राजस्थान के आधुनिक इतिहासकारों में मुन्शी देवी प्रसाद का महत्त्वपूर्ण स्थान है। इतिहास के क्षेत्र में उसका एक अनन्य योगदान मध्यकालीन फ़ारसी के ऐतिहासिक ग्रन्थों का हिन्दी अनुवाद है। वर्तमान समय में उसके द्वारा अनुदित ग्रन्थों में खानखानानामा, जहाँगीरनामा, शाहजहाँनामा एवं औरंगज़ेबनामा ग्रन्थ उपलब्ध हैं। तब फ़ारसी से अनभिज्ञ गौरीशंकर हीराचन्द ओझा आदि इतिहासकारों ने मुन्शी देवी प्रसाद के हिन्दी अनुवाद ग्रन्थों को ही आधार बनाया था।
महाराजकुमार डॉ. रघुबीर सिंह मुन्शी देवी प्रसाद द्वारा अनुदित अप्राप्य ग्रन्थों को सम्पादित कर पुनः प्रकाशित कराना चाहते थे। इस क्रम में उन्होंने शाहजहाँनामा और जहाँगीरनामा को सम्पादित किया था। ये ग्रन्थ क्रमशः 1975 एवं 1996 में प्रकाशित हुये। महाराजकुमार डॉ. रघुबीर सिंह अपने जीवनकाल में खानखानानामा एवं औरंगज़ेबनामा का सम्पादन नहीं कर सके। इसी क्रम में औरंगज़ेबनामा का यह सम्पादित संस्करण प्रकाशित किया जा रहा है।
मुन्शी देवी प्रसाद कृत औरंगज़ेबनामा मूलतः 1710 ई. में मुहम्मद साक़ी मुस्ताद खाँ द्वारा फ़ारसी में लिखित मआसिर-ए-आलमगीरी -ए-आलमगीरी का हिन्दी अनुवाद है। मुन्शी देवी प्रसाद ने उन्नीसवीं शताब्दी में आगरा के इलाही नामक लिथो प्रेस से प्रकाशित उक्त ग्रन्थ से हिन्दी अनुवाद किया था। कालान्तर में जदुनाथ सरकार ने एशियाटिक सोसाइटी कलकत्ता द्वारा 1871 ई. में प्रकाशित मआसिर-ए-आलमगीरी का अँग्रेजी अनुवाद 1947 ई. में कलकत्ता से प्रकाशित किया था। यों, इस रूप में मुन्शी देवी प्रसाद कृत औरंगज़ेबनामा का महत्त्व बना हुआ है।
| Weight | 405 g |
|---|---|
| Dimensions | 22.5 × 14.5 × 1.5 cm |






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