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अफ़सर की गाय

Language: हिंदी
Pages: 176
Edition: Forth, 2011
Published Year: 1999
ISBN: 978-81-7056-156-9

Original price was: ₹200.00.Current price is: ₹180.00.

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Afsar Ki Gaay पूरन सरमा का व्यंग्य संकलन ‘अफसर की गाय’ विद्रूप चेहरों पर गहरी चोट है, जो असंगत मूल्यों और विसंगतियों को साफ स्वरुप के साथ देखा जा सकता है। यह संग्रह समाज का यथार्थ है, जिसमें छल-प्रपंच और विडम्बनाओं का मायाजाल फैलता है। यह कृति हास-परिहास और विनोदी संवादों के साथ व्यंग्यों की सरलता और बोधगम्यता को बनाए रखती है, जो पाठकों को विसंगतियों से साक्षात्कार कराती है।

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व्यंग्य वक्रोक्ति का रूप है और इसी से असंगत मूल्य साफ स्वरुप के साथ देखे जा सकते हैं। व्यंग्य ही समाज का यथार्थ है अन्यथा छल- प्रपंच और विडम्बनाओं का मायाजाल नहीं फैलता हमारे चारों ओर। व्यंग्य जिस सुघड़ता से पूर्ण कौशल से हमें विसंगतियों से साक्षात् कराता है, उससे लगता है वह किसी शक्तिमान से कम नहीं है। घोर भौतिकतावादी जगत की चकाचौंध का खुला आइना है एक व्यंग्य रचना, जिसमें हरेक को अपना-अपना अक्श दिखाया जा सकता है।

अफसर की गांय’ व्यंग्य संकलन ऐसी रचनाओं को उपस्थित करता है हमारे सामने। इसकी व्यंग्य रचनायें समसामयिक विसंगतियों, विद्रूपताओं तथा विडम्बनाओं को चिंदी-चिंदी कर वास्तविकता को सामने लाती है। यह वास्तविकता हमारा आदर्श और सुधार भी हो सकता है। इस दृष्टि से व्यंग्यकार का प्रयास सफलता के बहुत करीब तक जा पहुँचता है और उनमें एक आत्मविश्वास बनता दिखाई देता है।

व्यंग्यों की सरलता, बोधगम्यता इनके प्राण हैं। बहुत ही शालीन और शिष्ट तेवर के साथ वक्रोक्तियाँ जब सामने आती हैं तो मर्म को भेद जाती हैं। हास-परिहास के साथ विनोदी संवाद संकलन की रचनाओं के आस्वाद को बढ़ाते हैं। फिर निर्णय पाठकों का है कि वे इससे कितना सहमत हो पाते हैं।

Weight325 g
Dimensions22.5 × 14.5 × 1.5 cm
Genre

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