Showing 121–140 of 365 resultsSorted by popularity
-
Sale!

-
Sale!

भारत दुर्दशा
₹70.00Original price was: ₹70.00.₹56.00Current price is: ₹56.00. -
Sale!

-
Sale!

-
Sale!

ढोला मारू रा दुहा (व्याख्या और विवेचन)
By: शंभुसिंह मनोहर₹250.00Original price was: ₹250.00.₹200.00Current price is: ₹200.00. -
Sale!

महाकवि सूर्यमल मिश्रण कृत “वीर सतसई”
By: शंभुसिंह मनोहर₹250.00Original price was: ₹250.00.₹200.00Current price is: ₹200.00. -
Sale!

व्यावहारिक वास्तुशास्त्र
₹120.00Original price was: ₹120.00.₹96.00Current price is: ₹96.00. -
Sale!

-
Sale!

महाकवि सूरदास कृत भ्रमरगीत सार
₹80.00Original price was: ₹80.00.₹64.00Current price is: ₹64.00. -
Sale!

-
Sale!

निर्मला
By: प्रेमचन्द₹80.00Original price was: ₹80.00.₹64.00Current price is: ₹64.00.निर्मला मुंशी प्रेमचंद का एक सशक्त सामाजिक उपन्यास है, जो दहेज प्रथा, बेमेल विवाह और नारी जीवन की पीड़ा को यथार्थ रूप में प्रस्तुत करता है। यह उपन्यास स्त्री की सामाजिक स्थिति और मानसिक संघर्ष को गहराई से उजागर करता है।
-
Sale!

कर्मभूमि
By: प्रेमचन्द₹150.00Original price was: ₹150.00.₹120.00Current price is: ₹120.00.कर्मभूमि मुंशी प्रेमचंद का एक विचारप्रधान सामाजिक-राजनीतिक उपन्यास है। इसमें स्वतंत्रता आंदोलन के समय की सामाजिक असमानता, जाति-भेद, नारी-स्थिति और नैतिक संघर्षों को यथार्थवादी ढंग से प्रस्तुत किया गया है। यह उपन्यास कर्म, त्याग और सामाजिक उत्तरदायित्व का संदेश देता है।
View details This product has multiple variants. The options may be chosen on the product page -
Sale!

मानसरोवर (भाग-8)
By: प्रेमचन्द₹100.00Original price was: ₹100.00.₹80.00Current price is: ₹80.00.अंतिम खंड में प्रेमचंद के अनुभवों और विचारों की परिपक्व अभिव्यक्ति देखने को मिलती है। यथार्थ, दर्शन और मानवीय संवेदना से भरपूर ये कहानियाँ प्रेमचंद के साहित्यिक योगदान को पूर्णता प्रदान करती हैं।
-
Sale!

मानसरोवर (भाग-7)
By: प्रेमचन्द₹100.00Original price was: ₹100.00.₹80.00Current price is: ₹80.00.इस भाग में तीव्र सामाजिक चेतना से युक्त कहानियाँ संकलित हैं, जो पाखंड, अन्याय और नैतिक पतन पर प्रहार करती हैं। ये कहानियाँ आज के समय में भी उतनी ही प्रासंगिक और प्रभावशाली हैं।
-
Sale!

मानसरोवर (भाग-6)
By: प्रेमचन्द₹100.00Original price was: ₹100.00.₹80.00Current price is: ₹80.00.इस खंड की कहानियाँ सामाजिक सुधार, शिक्षा और बदलते सामाजिक मूल्यों पर केंद्रित हैं। इसमें स्वतंत्रता-पूर्व भारत की सामाजिक परिस्थितियों और परिवर्तनशील सोच का सजीव चित्रण मिलता है।
-
Sale!

मानसरोवर (भाग-5)
By: प्रेमचन्द₹100.00Original price was: ₹100.00.₹80.00Current price is: ₹80.00.इस भाग में किसान जीवन, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, शोषण और संघर्ष को प्रमुखता दी गई है। प्रेमचंद की कहानियाँ समाज के दबे-कुचले वर्ग की पीड़ा को संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत करती हैं और सामाजिक न्याय की भावना को मजबूत करती हैं।
-
Sale!

मानसरोवर (भाग-4)
By: प्रेमचन्द₹100.00Original price was: ₹100.00.₹80.00Current price is: ₹80.00.इस खंड की कहानियाँ मनोवैज्ञानिक दृष्टि से अधिक सशक्त हैं। पात्रों के अंतर्द्वंद्व, नैतिक संघर्ष और मानवीय दुर्बलताओं का सूक्ष्म चित्रण इस भाग को विशेष बनाता है। यह प्रेमचंद की साहित्यिक परिपक्वता को दर्शाता है।
-
Sale!

मानसरोवर (भाग-3)
By: प्रेमचन्द₹100.00Original price was: ₹100.00.₹80.00Current price is: ₹80.00.इस भाग में सामाजिक विषमता, जाति-भेद और परंपरा बनाम सुधार के संघर्ष को प्रभावशाली ढंग से दर्शाया गया है। कहानियाँ समाज की कड़वी सच्चाइयों को उजागर करती हैं और प्रेमचंद की सामाजिक चेतना को स्पष्ट रूप से सामने लाती हैं।
-
Sale!

मानसरोवर (भाग-2)
By: प्रेमचन्द₹100.00Original price was: ₹100.00.₹80.00Current price is: ₹80.00.इस खंड की कहानियाँ पारिवारिक संबंधों, नैतिक मूल्यों और मानवीय संघर्षों पर केंद्रित हैं। नारी जीवन, त्याग, करुणा और कर्तव्य जैसे विषयों को गहराई से प्रस्तुत किया गया है, जो पाठक को आत्मचिंतन के लिए प्रेरित करता है।
-
Sale!

काव्यांग विवेचन
By: डॉ. हेतु भारद्वाज (+1 more)₹150.00Original price was: ₹150.00.₹120.00Current price is: ₹120.00.यह पुस्तक काव्य के विभिन्न अंगों—रस, छन्द, अलंकार, रीति आदि—का सरल एवं व्यवस्थित विवेचन प्रस्तुत करती है। इसमें 84 छन्दों, 74 अलंकारों, 14 काव्य दोषों तथा हिन्दी-अंग्रेजी अलंकारिक शब्दों का उदाहरण सहित वर्णन किया गया है। काव्य-शास्त्र को समझने और उसका सही आस्वादन करने के लिए यह एक उपयोगी एवं समग्र कृति है, जो विद्यार्थियों, शिक्षकों, शोधकर्ताओं एवं प्रतियोगी परीक्षार्थियों के लिए विशेष रूप से लाभकारी सिद्ध होती है।

प्राचीन भारत में न्यायिक प्रणाली