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ढोला मारू रा दुहा (व्याख्या और विवेचन)
By: शंभुसिंह मनोहर₹250.00Original price was: ₹250.00.₹200.00Current price is: ₹200.00. -
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महाकवि सूर्यमल मिश्रण कृत “वीर सतसई”
By: शंभुसिंह मनोहर₹250.00Original price was: ₹250.00.₹200.00Current price is: ₹200.00. -
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निर्मला
By: प्रेमचन्द₹80.00Original price was: ₹80.00.₹64.00Current price is: ₹64.00.निर्मला मुंशी प्रेमचंद का एक सशक्त सामाजिक उपन्यास है, जो दहेज प्रथा, बेमेल विवाह और नारी जीवन की पीड़ा को यथार्थ रूप में प्रस्तुत करता है। यह उपन्यास स्त्री की सामाजिक स्थिति और मानसिक संघर्ष को गहराई से उजागर करता है।
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कर्मभूमि
By: प्रेमचन्द₹150.00Original price was: ₹150.00.₹120.00Current price is: ₹120.00.कर्मभूमि मुंशी प्रेमचंद का एक विचारप्रधान सामाजिक-राजनीतिक उपन्यास है। इसमें स्वतंत्रता आंदोलन के समय की सामाजिक असमानता, जाति-भेद, नारी-स्थिति और नैतिक संघर्षों को यथार्थवादी ढंग से प्रस्तुत किया गया है। यह उपन्यास कर्म, त्याग और सामाजिक उत्तरदायित्व का संदेश देता है।
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मानसरोवर (भाग-8)
By: प्रेमचन्द₹100.00Original price was: ₹100.00.₹80.00Current price is: ₹80.00.अंतिम खंड में प्रेमचंद के अनुभवों और विचारों की परिपक्व अभिव्यक्ति देखने को मिलती है। यथार्थ, दर्शन और मानवीय संवेदना से भरपूर ये कहानियाँ प्रेमचंद के साहित्यिक योगदान को पूर्णता प्रदान करती हैं।
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मानसरोवर (भाग-7)
By: प्रेमचन्द₹100.00Original price was: ₹100.00.₹80.00Current price is: ₹80.00.इस भाग में तीव्र सामाजिक चेतना से युक्त कहानियाँ संकलित हैं, जो पाखंड, अन्याय और नैतिक पतन पर प्रहार करती हैं। ये कहानियाँ आज के समय में भी उतनी ही प्रासंगिक और प्रभावशाली हैं।
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मानसरोवर (भाग-6)
By: प्रेमचन्द₹100.00Original price was: ₹100.00.₹80.00Current price is: ₹80.00.इस खंड की कहानियाँ सामाजिक सुधार, शिक्षा और बदलते सामाजिक मूल्यों पर केंद्रित हैं। इसमें स्वतंत्रता-पूर्व भारत की सामाजिक परिस्थितियों और परिवर्तनशील सोच का सजीव चित्रण मिलता है।
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मानसरोवर (भाग-5)
By: प्रेमचन्द₹100.00Original price was: ₹100.00.₹80.00Current price is: ₹80.00.इस भाग में किसान जीवन, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, शोषण और संघर्ष को प्रमुखता दी गई है। प्रेमचंद की कहानियाँ समाज के दबे-कुचले वर्ग की पीड़ा को संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत करती हैं और सामाजिक न्याय की भावना को मजबूत करती हैं।
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मानसरोवर (भाग-4)
By: प्रेमचन्द₹100.00Original price was: ₹100.00.₹80.00Current price is: ₹80.00.इस खंड की कहानियाँ मनोवैज्ञानिक दृष्टि से अधिक सशक्त हैं। पात्रों के अंतर्द्वंद्व, नैतिक संघर्ष और मानवीय दुर्बलताओं का सूक्ष्म चित्रण इस भाग को विशेष बनाता है। यह प्रेमचंद की साहित्यिक परिपक्वता को दर्शाता है।
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मानसरोवर (भाग-3)
By: प्रेमचन्द₹100.00Original price was: ₹100.00.₹80.00Current price is: ₹80.00.इस भाग में सामाजिक विषमता, जाति-भेद और परंपरा बनाम सुधार के संघर्ष को प्रभावशाली ढंग से दर्शाया गया है। कहानियाँ समाज की कड़वी सच्चाइयों को उजागर करती हैं और प्रेमचंद की सामाजिक चेतना को स्पष्ट रूप से सामने लाती हैं।
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मानसरोवर (भाग-2)
By: प्रेमचन्द₹100.00Original price was: ₹100.00.₹80.00Current price is: ₹80.00.इस खंड की कहानियाँ पारिवारिक संबंधों, नैतिक मूल्यों और मानवीय संघर्षों पर केंद्रित हैं। नारी जीवन, त्याग, करुणा और कर्तव्य जैसे विषयों को गहराई से प्रस्तुत किया गया है, जो पाठक को आत्मचिंतन के लिए प्रेरित करता है।
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जायसी कृत पद्मावत
₹250.00Original price was: ₹250.00.₹200.00Current price is: ₹200.00.विषय-सूची वक्तव्य (प्रथम संस्करण) वक्तव्य (द्वितीय संस्करण) मलिक मुहम्मद जायसी पदमावत स्तुतिखंड सिंहलद्वीप वर्णन खंड जन्म खंड मानसरोदक खंड सुआ खंड रत्नसेन जन्म खंड बनिजारा खंड नागमती सुआ संवाद खंड राजा-सुआ संवाद खंड नखशिख खंड प्रेमखंड जोगी खंड राजा-गजपति-संवाद खंड बोहित खंड सात समुद्र खंड सिंघलदीप खंड मंडपगमन खंड पदमावती-वियोग-खंड पदमावती-सुआ-भेंट-खंड बसंत खंड राजा रत्नसेन…
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Animal Farm
By: George OrwellNEP 2020₹100.00Original price was: ₹100.00.₹80.00Current price is: ₹80.00. -
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रवीन्द्रनाथ टैगोर की श्रेष्ठ कहानियाँ
₹200.00Original price was: ₹200.00.₹180.00Current price is: ₹180.00.रवीन्द्रनाथ टैगोर विश्व के उन विरल रचनाकारों में हैं जिनमें व्यक्तित्व और साहित्य का अद्भुत सामंजस्य मिलता है। टैगोर के व्यक्तित्व को देखकर ही लगता था कि साहित्य की व्यापकता सिमटकर उनमें मूर्त हो गयी है। उन्हें ‘गीतांजलि’ नामक कृति पर नोबेल पुरस्कार मिला, जिससे उनकी ख्याति सारे विश्व में फैल गयी। यदि यह पुरस्कार…
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चपलूसी का अनुशासन
By: अजय अनुरागी₹200.00Original price was: ₹200.00.₹180.00Current price is: ₹180.00.“चापलूसी का अनुशासन” एक ऐसा व्यंग्य संग्रह है जो व्यक्ति के भीतर छिपी चिपकी स्वार्थ और चापलूसी की प्रवृत्ति के छिलकों को उतारकर उजागर करने की कोशिश करता है। व्यक्ति अधिकारों के प्रति सजगता दिखा रहा है, किन्तु कर्त्तव्यों के प्रति उदासीन, ऐसा क्यों? ये व्यंग्य व्यक्ति के उन मनोवैज्ञानिक पक्षों का भी खुलासा करते…
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चरणं शरणं गच्छामि
By: अजय अनुरागी₹200.00Original price was: ₹200.00.₹180.00Current price is: ₹180.00.चरणम् शरणम् गच्छामि’ अजय अनुरागी के विविधता एवं नवीनता से युक्त प्रभावी व्यंग्यों का ऐसा संग्रह है जिसमें उपेक्षित एवं आम आदमी की पीड़ा को जुबान मिली है। इन व्यंग्यों में विज्ञापन जगत की अस्थायी चकाचौंध से लेकर राजनीति के झूठे झांसों व वादों के अभ्यस्तों, समाज की वैषम्यपूर्ण सोच से लेकर वैयक्तिक नैतिक पतन…
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साहित्य में पूँजी निवेश
By: अजय अनुरागी₹200.00Original price was: ₹200.00.₹180.00Current price is: ₹180.00.व्यंग्य विधा समाज से सीधा सम्बध रखने वाली विधा है। बदलते सामाजिक संदभों में व्यंग्य समाज की जरूरत बन गया है। अजय अनुरागी के व्यंग्य समाज की इसी जरूरत को पूरा करते हैं। “साहित्य में पूँजी निवेश” में व्यंग्यकार अपने समय की सही और सच्ची तस्वीर प्रस्तुत करता है, भले ही वह कुरूप और भट्टी…

धरती एक कॉस्मोज में
एक हंसी की उम्र
दर्प
भारत का इतिहास (1526–1756 ई.)
सांझ हो गई
किरये की कोख उर्फ अधूरा इंकलाब
मंत्री बनकर रहेगे
शाह आलम
Chandragupta Vikramaditya - Digvijay Bhag-3
मध्यकालीन भारत का इतिहास (1526-1656 ई.)
गौतमीपुत्र भाग-2 (आँचल का दूध)
नेताजी का मुंडन