P.D. Sharma

डॉ. प्रभुदत्त शर्मा ‘पथिक’ भारतीय राजनीति, लोक प्रशासन, साहित्य एवं चिंतन के क्षेत्र के प्रतिष्ठित विद्वान, शिक्षाविद् और लेखक रहे हैं। उनका जन्म 24 जून 1933 को राजस्थान के अलवर शहर में हुआ। वे राजनीति विज्ञान, इतिहास एवं हिन्दी विषयों में विश्वविद्यालय के स्वर्ण पदक विजेता रहे तथा उन्होंने अमेरिका के मिनेसोटा विश्वविद्यालय से एम.पी.ए. और पीएच.डी. की उपाधियाँ प्राप्त कीं।

उच्च शिक्षा एवं शोध के क्षेत्र में उनका योगदान उल्लेखनीय रहा है। उन्होंने राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर में राजनीति विज्ञान एवं लोक प्रशासन के अध्यापन और शोध कार्य को नई दिशा प्रदान की। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उनकी विद्वता को मान्यता मिली और उन्हें अमेरिका के नॉर्थ कैरोलिना स्थित लिनोर-राइन परिसर में विजिटिंग प्रोफेसर के रूप में अध्यापन एवं शोध कार्य के लिए आमंत्रित किया गया।

डॉ. शर्मा ने विभिन्न देशों में आयोजित शैक्षणिक एवं अकादमिक कार्यक्रमों में भारत का प्रतिनिधित्व किया। उन्हें अनेक अंतरराष्ट्रीय संस्थानों द्वारा व्याख्यान, शोध एवं अकादमिक सहभागिता के लिए आमंत्रित किया गया। भारतीय राजनीति, प्रशासन, समाज एवं समकालीन विषयों पर उनके विचारों को व्यापक सम्मान प्राप्त हुआ।

एक बहुआयामी साहित्यकार के रूप में उनकी अनेक शोधपरक पुस्तकें, शोध-पत्र, कविता-संग्रह, अनूदित ग्रंथ, काव्य-संकलन तथा यात्रा-वृत्त प्रकाशित हुए हैं। उनके साहित्य में वैचारिक गहराई, सामाजिक संवेदना और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों का सशक्त समन्वय देखने को मिलता है। हिन्दी साहित्य और बौद्धिक विमर्श के क्षेत्र में उनका योगदान विशेष रूप से उल्लेखनीय है।

शिक्षण, शोध, लेखन और चिंतन के माध्यम से डॉ. प्रभुदत्त शर्मा ‘पथिक’ ने अकादमिक जगत और हिन्दी साहित्य को समृद्ध बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी कृतियाँ आज भी विद्यार्थियों, शोधार्थियों, साहित्यकारों और चिंतकों के लिए प्रेरणा एवं अध्ययन का महत्वपूर्ण स्रोत हैं।

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  • Sale! Bhartrihari ki Amar Rachna

    भर्तृहरि की अमर रचना

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    Bhartrihari ki Amar Rachna नीति, वैराग्य और श्रृंगार-शतकों के प्रणेता महाराजा भर्तृहरि की अमर रचनाओं का डॉ. पी.डी. शर्मा द्वारा अंग्रेजी में सरस अनुवाद। यह कृति भर्तृहरि के व्यापक अनुभव संसार और उनकी वाणी के मुख्य भाव वैराग्य को दर्शाती है, जो तीनों शतकों में व्यक्त भावशवलता, अभिव्यक्ति की भास्वरता और भाषा की सहजता के कारण विश्व की अनेक भाषाओं में अनूदित हुए हैं।

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