मनमोहन सेहगल

डॉ. मनमोहन सहगल हिन्दी साहित्य के प्रतिष्ठित विद्वान, शोधकर्ता, समीक्षक एवं उपन्यासकार रहे हैं। उनका जन्म 15 अप्रैल 1932 को हुआ। उन्होंने हिन्दी एवं दर्शनशास्त्र में एम.ए. तथा पीएच.डी. एवं डी.लिट्. की उपाधियाँ प्राप्त कीं। अध्ययन, अध्यापन, शोध एवं सृजन उनके जीवन के प्रमुख कार्यक्षेत्र रहे हैं।

डॉ. सहगल ने हिन्दी साहित्य, शोध एवं आलोचना के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनकी लगभग 30 शोध एवं समीक्षापरक पुस्तकें प्रकाशित हुईं, जिन्हें अकादमिक जगत में विशेष सम्मान प्राप्त है। धार्मिक एवं सांस्कृतिक साहित्य के क्षेत्र में उनका कार्य भी उल्लेखनीय रहा है। उन्होंने सम्पूर्ण गुरु ग्रंथ साहिब का हिन्दी टीकाकरण चार खंडों में प्रस्तुत किया तथा अनेक प्राचीन पाण्डुलिपियों का लिप्यंतरण एवं संपादन किया।

साहित्य सृजन के क्षेत्र में उनकी बहुआयामी प्रतिभा का परिचय उनके उपन्यासों से मिलता है। उनके प्रमुख उपन्यासों में ज़िंदगी और ज़िंदगी, ज़िंदगी और आदमी, बदलती करवटें, कश्मीर की कसक, गुरु लाधो रे, एक और रक्तबीज, अन्ना पासवान, नरमेध, घटता-बढ़ता चाँद, अथ कॉलेज कथा, मानव छला गया, समझौते से पहले, काला सच तथा मिले सुर मेरा तुम्हारा विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। उनके लेखन में सामाजिक यथार्थ, मानवीय संबंधों, सांस्कृतिक मूल्यों एवं समकालीन जीवन की जटिलताओं का प्रभावशाली चित्रण मिलता है।

इसके अतिरिक्त उन्होंने किशोर पाठकों के लिए भी अनेक रचनाएँ लिखीं, जिनमें ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायक विषयों को सरल और रोचक शैली में प्रस्तुत किया गया है।

अपने दीर्घ साहित्यिक एवं अकादमिक जीवन में डॉ. मनमोहन सहगल ने हिन्दी साहित्य, शोध एवं आलोचना को समृद्ध बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी कृतियाँ आज भी विद्यार्थियों, शोधार्थियों, साहित्यकारों एवं सामान्य पाठकों के लिए महत्वपूर्ण संदर्भ सामग्री के रूप में प्रतिष्ठित हैं।

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  • Sale! Hindi Shodh-Tantra Ki Rooprekha

    हिन्दी शोध-तन्त्र की रूपरेखा

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    विश्वविद्यालय की स्थापना जिन कार्यों के निष्पादन के लिए होती है, उनमें शोध कार्य कराना उसका सबसे महत्त्पूर्ण कार्य होता है। शोध का मूल अर्थ है-ज्ञान के उस अनुषंग को प्रकाश में लाना जिसके विषय में हम अभी तक अभिज्ञ हैं। संसार का सारा वैज्ञानिक तथा ज्ञानात्मक विकास मनुष्य के शोध कार्यों का ही परिणाम है। विश्वविद्यालय के विभिन्न विभाग अपने-अपने विषय में शोध कराते हैं। इस तरह वे अपने क्षेत्र की ज्ञान सम्पदा को प्रकाश में लाते हैं और इस दिशा में आगे की पीढ़ी का मार्ग प्रशस्त करते हैं।

    शोध एक वैज्ञानिक और वैधानिक प्रक्रिया है जो सतत् साधना, योजनाबद्ध कार्य तथा एक सुनिश्चित विधान की अपेक्षा रखती है। हिन्दी में शोध कार्य का इतिहास बहुत पुराना नहीं है तथा देश-विदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों के हिन्दी तथा भाषा विभागों में लम्बे अरसे से शोध कार्य हो रहे हैं।

    शोध कार्यों की परम्परा-समृद्धि के साथ-साथ हिन्दी में शोध-प्रविधि पर सैद्धान्तिक ग्रन्थों का प्रणयन भी होता रहा है। विकास की इस प्रक्रिया में शोध का शास्त्र ही विकसित हो गया है। डॉ. मनमोहन सहगल की प्रस्तुत कृति हिन्दी में शोध-तंत्र के सैद्धान्तिक और व्यावहारिक पक्षों का गम्भीर और विशद् आख्यान करती है। पुस्तक के सैद्धान्तिक विवेचन में विद्वान लेखक ने शोध की परिभाषा, शोध के प्रकार, पाठ-शोध विधि, शोध की पद्धतियाँ आदि का विस्तृत विवेचन किया है तो द्वितीय खण्ड में शोध के व्यावहारिक पक्षों का सम्यक् उद्घाटन किया गया है। शोध-शास्त्र को समझने तथा शोधकर्ताओं के लिए यह एक अपरिहार्य पुस्तक है।

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  • Sale! Kiraye Ki Kokh Urf Adhura Inkalab

    किरये की कोख उर्फ ​​अधूरा इंकलाब

    Original price was: ₹250.00.Current price is: ₹225.00.

    यह उपन्यास “किराए की कोख” के माध्यम से युगीन सत्यों और स्वार्थ-परार्थ के बीच की कशमकश पर करारा व्यंग्य करता है। यह बदलती सामाजिक मानसिकता, नारी शोषण और मानवीय आकांक्षाओं की विडंबनाओं को मार्मिकता से उजागर करता है।

  • Sale! Mama Shakuni

    मामा शकुनि

    Original price was: ₹300.00.Current price is: ₹270.00.

    महाभारत’ पर आधारित यह उपन्यास शकुनि के चरित्र को केंद्र में रखकर नारी सम्मान, स्त्री संवेदना और युद्ध-दर्शन की नवीन व्याख्या प्रस्तुत करता है। यह गांधारी के कृत्य और भीष्म-शकुनि के गुणों का आधुनिक सोच से विश्लेषण करता है।

  • Sale! Mile Sur Mera Tumhara

    मिले सुर मेरा तुम्हारा

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    Mile Sur Mera Tumhara मनमोहन सहगल का उपन्यास ‘मिले सुर मेरा तुम्हारा’ आँचलिकता की गंध में लिपटी वर्तमान समाज की संकीर्णताओं का यथार्थ दस्तावेज है। यह पंजाब में प्रवासी मजदूरों के आयात, नशे की लत, कन्या भ्रूण हत्या, और आतंकी साया जैसे ज्वलंत मुद्दों को उजागर करता है, साथ ही पंजाबियों की उदारता, परिश्रम, सम-भाव, और संबंधों की मिठास को दर्शाते हुए ‘मिले सुर मेरा तुम्हारा, सुर बने हमारा’ का विराट संदेश देता है।

  • Sale! Kala Sach (Aitihasik Upanyasa)

    काला सच (ऐतिहासिक उपन्यास)

    Original price was: ₹200.00.Current price is: ₹180.00.

    Kala Sach (Aitihasik Upanyasa) मनमोहन सहगल का ऐतिहासिक उपन्यास ‘काला सच’ पाटण-नरेश करणादेव और उनके दुर्भाग्यशाली परिवार की मार्मिक नियति को दर्शाता है। यह कृति मानवीय दर्द, अंधे सांप्रदायिक अत्याचारों और कर्म-चक्र के प्रभावों को संवेदनशीलता से चित्रित करती है, जहाँ पिता के कर्मों का फल पुत्री को भी भुगतना पड़ता है, जिससे उत्तम जीवन जीने के लिए सत्कर्मों की प्रेरणा मिलती है।

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