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सत्यपथ

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Satyapath यादवेन्द्र शर्मा ‘चन्द्र’ का उपन्यास ‘सत्यपथ’ उनके पूर्ववर्ती उपन्यासों का आदर्शमूलक विस्तार है, जिसमें स्वतंत्र भारत के जीवन में आए बहुआयामी परिवर्तनों का विशद् रेखांकन किया गया है। उपन्यास का नायक गंगेश नये भारत के निर्माण के आधार सूत्रों का कर्णधार है, जो सर्वत्र सत्य का पक्ष लेता है और अपनी रोचक शैली से पाठक के मन में आदर्शों के प्रति गहरी आसक्ति उत्पन्न करता है।

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यादवेन्द्र शर्मा ‘चन्द्र’ हिन्दी की वरिष्ठ पीढ़ी के ऐसे विरले कथाकार हैं, जिन्होंने अपना जीवन केवल कलम के बल पर जिया है। उन्होंने अनेक विधाओं में लिखा है, किन्तु उनकी पहचान एक कथाकार के रूप में अधिक है। उनकी कहानियाँ तथा उनके उपन्यास राजस्थान के जीवन की विद्रूपताओं, विसंगतियों तथा यहाँ की भौगोलिक स्थितिजन्य मुश्किलों कां प्रामाणिक चित्र प्रस्तुत करती हैं। उन्होंने अनेक ऐतिहासिक उपन्यासों में यहाँ के सामंती जीवन की क्रूरताओं तथा विडम्बनाओं का वर्णन किया है।

चन्द्रजी का प्रस्तुत उपन्यास ‘सत्यपथ’ उनके पूर्ववर्ती उपन्यासों का आदर्शमूलक विस्तार है। इस उपन्यास में चन्द्र ने स्वतंत्र भारत के जीवन में आये बहुआयामी परिवर्तनों का विशद् रेखांकन किया है। उपन्यास का नायक गंगेश नये भारत के निर्माण के आधार सूत्रों का कर्णधार है। सामान्य अध्यापक होते हुए भी उसका चरित्र असाधारण है, क्योंकि वह सर्वत्र सत्य का पक्ष लेता है। सत्य की प्रतिष्ठा ही उसके जीवन का चरम लक्ष्य है।

संदीपन शिक्षा मंदिर के रूप में वह सुहासिनी के साथ अपने सत्यपथ के स्वप्न को साकार करता है। यह संस्था वर्तमान और भविष्य के लिए सत्य का मार्ग प्रशस्त करती है। चन्द्र की कथाकृतियों की सबसे बड़ी विशेषता उनकी रोचकता है। यह उपन्यास भी अपनी पठनीयता में बेजोड़ है तथा पाठक के मन में आदर्शों के प्रति गहरी आसक्ति उत्पन्न करता है।

Weight290 g
Dimensions22.5 × 14.5 × 2 cm
Genre

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