पश्चिमी विश्व का इतिहास

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विषय-सूची

अध्याय


1. सामान्तवाद का उदय एवं पतन

सामन्तवाद का अर्थ, सामन्तवाद का उदय: ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, सामन्तवाद का विकास, सामन्तवाद के विकास के कारण, सामन्ती कार्य विधि, सामन्तों के कर्तव्य, सामन्ती समाज और आर्थिक जीवन-कृषि का विकास, मेनर व्यवस्था, सामन्तवाद के पतन के कारण, सामन्त प्रथा के लाभ, सामन्त प्रथा के दोष।


2. पुनर्जागरण

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि; स्थिति में परिवर्तन, पुनर्जागरण का अर्थ, पुनर्जागरण की विशेषताएँ, पुनर्जागरण के कारण, इटली में पुनर्जागरण का प्रारम्भ, मानववाद का विकास, साहित्य में पुनर्जागरण की अभिव्यक्ति, कला के क्षेत्र में पुनर्जागरण, विज्ञान के क्षेत्र में पुनर्जागरण, भौगोलिक अनुसन्धान-कारण, खोजें और परिणाम, पुनर्जागरण के परिणाम और महत्त्व ।


3. धर्म सुधार आन्दोलन

सोलहवीं सदी के प्रारम्भ में कैथोलिक चर्च, धर्म सुधार आन्दोलन का अर्थ, आन्दोलन के कारण, धर्म सुधार के अग्रदूत, मार्टिन लूथर-लूथर के सिद्धान्त। ज्विंग्ली, काल्विन, इंगलैण्ड में एंग्लीकनवाद का उदय, प्रति-सुधार आन्दोलन-जैसुइट संगठन, सुधार आन्दोलन के परिणाम ।


4. पश्चिमी यूरोप में वाणिज्यिक क्रान्ति : वाणिज्यवाद

वाणिज्यिक क्रान्ति : परिवर्तनों का योगदान, मौद्रिक अर्थव्यवस्था का विकास, वितरण व्यवस्था में सुधार, संचार-साधनों में सुधार, परिवहन सेवाएँ, अटलांटिक महासागर का महत्त्व, व्यापारिक संगठनों का विकास, वाणिज्यवाद-भूमिका, वाणिज्यवाद का जन्म, वाणिज्यवाद का अर्थ, वाणिज्यवाद का उद्देश्य, वाणिज्यवाद के उदय के कारण, प्रमुख वाणिज्यवादी विचारक, वाणिज्यवादियों के प्रमुख विचार, वाणिज्यवाद की नीतियों का व्यावहारिक प्रयोग, वाणिज्यवाद की आलोचना, वाणिज्यवाद का पतन : कारण।


5. उपनिवेशवाद की शुरुआत

भूमिका, प्रारम्भिक उपनिवेशवाद के उद्देश्य, पुर्तगाली विस्तार, पूर्व की ओर विस्तार, स्पेनी विस्तार, अंग्रेजों के प्रयास, फ्रांसीसी विस्तार।


6. निरंकुश राज्यों का उदय : फ्रांस, स्पेन और ब्रिटेन

निरंकुश राजतन्त्र की विशेषताएँ, निरंकुश राजतन्त्रों के उदय के कारण, फ्रांस में निरंकुश राज्य का उदय-पारी के ड्यूक का निर्वाचन, कापे वंश के राजाओं की सत्ता का विस्तार, फिलिप चतुर्थ, शतंवर्षीय युद्ध, शतवर्षीय युद्ध के बाद, रिशील्यू का काल, कार्डिनल मजारिन, स्पैन में निरंकुश राज्य का उदय-ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, स्पेन का एकीकरण, चार्ल्स प्रथम, फिलिप द्वितीय, इंगलैण्ड में राष्ट्रीय राज्य का उदय- ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, गुलाबों का युद्ध, ट्यूडर का शासन।


7. वैज्ञानिक क्रान्ति

वैज्ञानिक क्रान्ति का अर्थ, वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास, कला, उद्योग एवं भौगोलिक ज्ञान का योगदान – लियोनार्डों डा विंसी, निकोलस कोपर्निकस, जाइडिनी ब्रूनों, टाइको ब्राहे, जोहांस केपलर, गैलिलियो गैलिली, जिरोलामो, फ्राकास्टोरो, विलियम हार्वे, बाल हेलमाट और राबर्ट बॉयल, बेकन और देकार्ते, अन्य परिवर्तन, रॉयल सोसायटी ऑफ लन्दन, सर आइजक न्यूटन ।


8. कृषि क्रान्ति, औद्योगिक क्रान्ति : नये सामाजिक वर्गों का उदय

कृषि व्यवस्था, कृषि के क्षेत्र में विकास- जेथ्रोटल, वाइकाउण्ड टाउनसैण्ड, रोबर्ट बेकबैल, रसायनिक खाद, कृषि के नये उपकरण, आर्थर यंग – नयी खेती, औद्योगिक क्रान्ति-औद्योगिक क्रान्ति का अर्थ, औद्योगिक क्रान्ति का काल, औद्योगिक क्रान्ति से पूर्व की स्थिति, क्रान्ति का सूत्रपात इंगलैण्ड से ही क्यों हुआ? औद्योगिक क्रान्ति के कारण, औद्योगिक क्रान्ति का स्वरूप – परिवहन एवं संचार में सुधार, उद्योग में क्रान्ति, आर्थिक सिद्धान्त एवं नीति, औद्योगिक क्रान्ति के परिणाम-आर्थिक, सामाजिक राजनीतिक ।


9. गौरवपूर्ण क्रान्ति (1688)

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि; क्रान्ति के कारण, क्रान्ति की प्रगति, क्रान्ति का स्वरूप, क्रान्ति का महत्त्व और परिणाम, संसद की सर्वोच्चता स्थापित होना, मन्त्रिमण्डल प्रणाली का विकास ।


10. अमेरिका का स्वतन्त्रता संग्राम

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि; उपनिवेशों में बसने के कारण, स्वतन्त्रता संघर्ष के कारण, स्वतन्त्रता संघर्ष की घटनाएँ, पेरिस की सन्धि, अमेरिका की विजय और अंग्रेजों की हार के कारण, अमेरिका की क्रान्ति का स्वरूप, क्रान्ति के परिणाम, क्रान्ति का महत्त्व ।


11. फ्रांस की क्रान्ति

क्रान्ति के पूर्व का इतिहास, क्रान्ति के कारण- राजनीतिक कारण, सामाजिक कारण, आर्थिक कारण, दार्शनिकों और विचारकों का योगदान, अन्य कारण। क्रान्ति के लिये उत्तरदायी घटनाएँ, राष्ट्रीय महासभा – कार्य और उपलब्धियाँ, संविधान सभा के कार्य, नई विधान सभा, कन्वेन्शन – आतंक का राज्य – रोबसपियर, डाइरेक्टरी का शासन, क्रान्ति का यूरोप पर प्रभाव।


12. नेपोलियन बोनापार्ट का उदय

प्रारम्भिक जीवन, इटली अभियान, मिस्त्र अभियान, सत्ता हस्तगत करने का षड्यन्त्र, कौंसिल शासन व्यवस्था- संविधान का निर्माण, व्यवस्था की स्थापना, प्रशासनिक सुधार, आर्थिक सुधार, पोप के साथ समझौता, शिक्षा सम्बन्धी सुधार, विधि संहिता, विदेश नीति, सम्राट नेपोलियन – यूरोप की प्रभुता का प्रयास, पतन की ओर- महाद्वीपीय प्रणाली, पोप से शत्रुता, स्पेन का राष्ट्रीय आन्दोलन, मास्को अभियान, लीपजिग का युद्ध, पतन के कारण, नेपोलियन की देन।


13. अनुदारवाद का युग

नेपोलियन के पतन के बाद यूरोप की समस्याएँ, वियना कांग्रेस-कांग्रेस के आधारभूत सिद्धान्त, वियना कांग्रेस के निर्णय, वियना कांग्रेस के कार्यों की समीक्षा, यूरोप की संयुक्त व्यवस्था-स्थापना के कारण, पवित्र मैत्री, चतुर्राष्ट्र मैत्री-चतुर्राष्ट्र मैत्री के उद्देश्य, चतुर्राष्ट्र मैत्री की समीक्षा, यूरोप की संयुक्त व्यवस्था की कार्यप्रणाली -एक्स-ला-शेपल का सम्मेलन, ट्रापो का सम्मेलन, लाइबेख का सम्मेलन, बेरोना का सम्मेलन, मुनरो सिद्धान्त, अन्तर्राष्ट्रीय सहयोग का अन्तिम प्रयास, संयुक्त व्यवस्था की असफलता के कारण, मेटरनिख और अनुदारवाद – परिचय, मेटरनिख की प्रणाली। मेटरनिख की गृहनीति, गृहनीति का प्रभाव, मेटरनिख की विदेश नीति, मेटरनिख का पतन, मेटरनिख का मूल्यांकन।


14. एशिया और अफ्रीका का यूरोप द्वारा शोषण

यूरोपीय साम्राज्यवाद का उदय, पुराने साम्राज्यवाद का आधार, साम्राज्यवाद का नया रूप, साम्राज्यवाद के प्रसार के कारण – आर्थिक, राजनीतिक, ईसाई धर्म-प्रचारकों का योगदान, एशिया में साम्राज्यवाद का नया रूप – मध्य एवं पश्चिमी एशिया, सुदूर-पूर्व एवं दक्षिण-पूर्वी एशिया, अफ्रीका में साम्राज्यवाद की विशेषताएँ- अफ्रीका की खोज, अफ्रीका का बँटवारा, कांगो की लूट-खसोट, बर्लिन सम्मेलन, मिस्त्र और इंगलैण्ड, सूडान की समस्या, दक्षिण अफ्रीका, अफ्रीका में फ्रांसीसी साम्राज्य, जर्मन उपनिवेश, इटली का साम्राज्य, पुर्तगाल, स्पेन। साम्राज्यवाद के प्रसार के परिणाम।


15. इंगलैण्ड में उदारवाद

उदारवाद क्या है? उदारवाद के उदय के लिये उत्तरदायी परिस्थितियाँ, उदारवाद की विशेषताएँ, परम्परागत उदारवादी, आधुनिक जनतन्त्रात्मक उदारवाद, उदारवाद का प्रभाव और महत्त्व। इंगलैण्ड में उदारवाद और लोकतन्त्र का विकास-प्रथम सुधार अधिनियम, चार्टिस्ट आन्दोलन, द्वितीय सुधार अधिनियम, तृतीय सुधार अधिनियम, संसदीय अधिनियम, स्त्रियों को मताधिकार, फैक्टरी कानून, शिक्षा के क्षेत्र में उदारवाद ।


16. अमेरिका का गृह-युद्ध

नवोदित संयुक्त राज्य अमेरिका की स्थिति, राज्यों के परस्पर विरोधी स्वार्थ अमेरिका में दास-प्रथा-प्रादुर्भाव एवं स्वरूप, गृहयुद्ध के कारण – आर्थिक असमानता, दास प्रथा, अब्राहम लिंकन का निर्वाचन, दूषित राजनीतिक प्रचार, दक्षिण के राज्यों का संघ से अलग होना, गृह-युद्ध की शुरूआत, गृह-युद्ध के प्रति यूरोप के अन्य राज्यों का रुख। गृह-युद्ध की मुख्य घटनाएँ, लिंकन की हत्या, गृह-युद्ध के प्रभाव और परिणामः सुदृढ़ राजनीतिक व्यवस्था की स्थापना, जन-धन की हानि, पारस्परिक घृणा का बढ़ना, औद्योगिक विकास, सामाजिक प्रभाव।


17. समाजवादी और मार्क्सवादी विचारधारा

समाजवादी आन्दोलन- ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, प्रारम्भिक समाजवादी, मार्क्सवादी समाजवाद, मार्क्स के सिद्धान्त, प्रथम इन्टरनेशनल और समाजवाद का विकास, फ्रांस में समाजवाद, जर्मनी में समाजवाद, इंगलैण्ड में समाजवाद, रूस में समाजवाद, द्वितीय इन्टरनेशनल और समाजवाद, मजदूर आन्दोलन।


18. यूरोप में राष्ट्रवाद : राष्ट्रवाद की विचारधारा

राष्ट्र एवं राष्ट्रवाद। राष्ट्रवाद की विशेषताएँ, राष्ट्रवाद की अभिव्यक्ति-विदेशी शासन से मुक्ति के लिये संघर्ष, राष्ट्रीय एकता, निरंकुश शासन के स्थान पर लोकतन्त्र, औद्योगिक एवं आर्थिक विकास की महत्त्वाकांक्षा, औपनिवेशिक विस्तार की महत्वाकांक्षा, उग्र राष्ट्रवाद।


19. इटली का एकीकरण

1815 में इटली की स्थिति, एकीकरण के मार्ग में बाधाएँ, एकीकरण के प्रयास – मेजिनी का उदय, 1848 का विद्रोह और युद्ध, विक्टर इमेनुअल द्वितीय, कैबूर के राजनीतिक विचार और उद्देश्य, कैबूर की आन्तरिक नीति, कैबूर की विदेश नीति, गैरीबाल्डी की सफलता से उत्पन्न कठिनाइयाँ, इटली का पूर्ण एकीकरण, पोप की स्थिति ।


20. जर्मनी का एकीरण

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि; बिस्मार्क के पूर्व एकीकरण की मन्द गति, एकीकरण की विचारधारा के प्रसार के कारण, विलियम प्रथम-बिस्मार्क का उदय, बिस्मार्क की रक्त और लोह की नीति, विदेशों से मित्रता, डेन्मार्क युद्ध, आस्ट्रिया से युद्ध – उत्तरी संघ का निर्माण, फ्रांस और प्रशा का युद्ध-जर्मन साम्राज्य की स्थापना, इटली और जर्मनी के एकीकरण का तुलनात्मक अध्ययन ।


21. प्रथम महायुद्ध

महायुद्ध के कारण-दो गुटों का निर्माण, शस्त्रीकरण के लिये होड़, राष्ट्रीयता, साम्राज्यवाद, अन्य कारण, तत्कालीन कारण, युद्ध का उत्तरदायित्व -आस्ट्रिया, सर्बिया, रूस, जर्मनी, फ्रांस, इंगलैण्ड। महायुद्ध की घटनाएँ, महायुद्ध के परिणाम – राजनीतिक परिणाम, आर्थिक परिणाम, सामाजिक परिणाम।


22. शान्ति व्यवस्थाएँ

पेरिस शान्ति सम्मेलन, शान्ति सम्मेलन के मूल आधार, वर्साय की सन्धि-राष्ट्र संघ सम्बन्धी प्रसंविदा, प्रादेशिक व्यवस्था, सैनिक व्यवस्था, आर्थिक व्यवस्था, कानूनी व्यवस्था, अन्य व्यवस्थाएँ। वर्साय व्यवस्था का जर्मनी पर प्रभाव, वर्साय सन्धि की आलोचना, सामान्य समीक्षा, क्या वर्साय व्यवस्था द्वितीय विश्व युद्ध का कारण थी? वर्साय की सन्धि और विल्कन के चौदह सूत्र, अन्य शान्ति सन्धियाँ – सेंट जर्मेन की सन्धि, ट्रियनो की सन्धि, न्यूइली की सन्धि, सेब्रे की सन्धि, निष्कर्ष।


23. रूसी क्रान्ति (1917): गृह-युद्ध और अधिनायकत्व

भूमिका; क्रान्ति के कारण, मार्च में क्रान्ति का प्रारम्भ, अस्थायी सरकार के कार्य, केरेन्सकी का सत्ता प्राप्त करना, लेनिन बोल्शेविक क्रान्ति, रूस का युद्ध से अलग होना, गृह-युद्ध और विदेशी हस्तक्षेप-लाल सेना का गठन, जार-जारीन की हत्या, आन्तरिक विद्रोह का दमन, बोल्शेविकों की सफलता के कारण, क्रान्ति के परिणाम- राजनीतिक परिणाम, सामाजिक परिणाम, आर्थिक परिणाम, क्रान्ति का महत्त्व और प्रभाव।


24. दो महायुद्धों के अन्तराल में आर्थिक और सामाजिक संकट

आर्थिक संकट; आर्थिक संकट के कारण, आर्थिक संकट का प्रसार, आर्थिक संकट से निपटने के प्रयास, आर्थिक संकट के परिणाम, समीक्षा, सामाजिक संकट।


25. नई विचारधाराओं का उद्गमन : फासिस्टवाद

इटली और शान्ति समझौता, आर्थिक संकट, राजनैतिक संकट, फासिस्टवाद के उत्कर्ष के कारण, मुसोलिनी का उदय, फासिस्ट शासन की स्थापना, फासीवाद के सिद्धान्त, फासिस्ट युवक का संगठन, इटली में फासीवाद की स्थापना का यूरोप पर प्रभाव, मुसोलिनी की गृहनीति, मुसोलिनी की विदेश नीति, मुसोलिनी का अन्त।


26. नई विचारधाराओं का उद्गमन : नाजीवाद

पृष्ठभूमि; आर्थिक संकट- प्रजातान्त्रिक सरकार की विदेश नीति, नाजीदल की प्रगति, उत्कर्ष के कारण, हिटलर की गृहनीति, हिटलर की विदेश नीति- मुख्य उद्देश्य, विदेश नीति के प्रमुख कार्य, द्वितीय महायुद्ध।


27. द्वितीय विश्व युद्ध

द्वितीय विश्व युद्ध के कारण, द्वितीय विश्व युद्ध की गतिविधियाँ, शान्ति समझौता, द्वितीय विश्व युद्ध के परिणाम।


28. साम्राज्यवाद का अवसान और विउपनिवेशीकरण

राष्ट्रवादी आन्दोलनों का स्वरूप, राष्ट्रवादी आन्दोलनों के कारण, अफ्रीकी राष्ट्रवाद के विशेष कारण, प्रमुख अफ्रीकी देशों में साम्राज्यवाद का अवसान- मिस्त्र, घाना, केन्या, अल्जीरिया, ट्यूनीशिया, मोरक्को, कांगो (बेल्जियम), उत्तरी रोडेशिया, न्यासालैण्ड और दक्षिणी रोडेशिया, निष्कर्ष। एशियाई देशों से औपनिवेशिक साम्राज्यवाद का अन्त-भारत का राष्ट्रवादी आन्दोलन, श्रीलंका का राष्ट्रवादी आन्दोलन, बर्मा का स्वतन्त्र होना, मलेशिया का राष्ट्रवादी आन्दोलन, हिन्दचीन का स्वतन्त्रता संघर्ष-कम्बोडिया का मुक्ति संघर्ष, लाओस का मुक्ति संघर्ष, वियतनाम का मुक्ति संघर्ष, हिन्देशिया का स्वतन्त्रता संघर्ष।


अभ्यास के लिए प्रश्न

Weight545 g
विश्वविद्यालय

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