मदन मोहन मालवीय: व्यक्तित्व एवं कृतित्व
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महामना पण्डित मदनमोहन मालवीय भारत की ऐसी विरल विभूति थे, जो भारतीय मानस के साकार रूपक थे। स्वच्छ धवल वस्त्रों से सज्जित, सिर पर साफा, ललाट पर चन्दन की सुन्दर बिन्दी, इकहरा बन्दन सात्विकता से उद्भासित मुखमण्डल-यह उनका पार्श्व रूप था तथापि मूलतः वे एक आदर्श, संवेदनशील और उदार हृदय हिन्दू थे। पत्रकारिता को कला मानते थे। मालवीयजी उसकी स्वतन्त्रता के लिये आजीवन संघर्षरत रहे। उन्होंने अनेक सम्पादकों को प्रशिक्षित किया। बाल्यावस्था से ही उनके मन में धर्म की सेवा का जबरदस्त भाव रहा। हिन्दू समाज, हिन्दू धर्म के संस्कार हिन्दू जीवन शैली की पुनर्निर्माण की उनके हृदय में बड़ी विकलता थी। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय उनकी अटूट आशावादिता एवं अथक परिश्रम का कीर्ति स्तम्भ है। उन्होंने नगरपालिका, प्रान्तीय विधान कौंसिल तथा भारतीय विधान कौंसिलों में वर्षों तक कर्मठ प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने राष्ट्रीय स्वतन्त्रता आन्दोलन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभायी। उन्होंने काँग्रेस में व्याप्त उदारवाद और उग्रवाद के बीच सेतु के रूप में कार्य किया। आज भारत की जिन विभूतियों पर हम गर्व कर सकते हैं, उनमें महामना पण्डित मदनमोहन मालवीय का स्थान बहुत ऊँचा है। वे निःसन्देह आजात शत्रु थे।
प्रस्तुत पुस्तक में मालवीय जी के व्यक्तित्व अनुपम गुणों को उजागर तथा कृतित्व का सम्यक विश्लेषण किया है। उनकी दृष्टि में भारत की दुर्दशा का कारण विदेशी आधिपत्य था। वे अपने जीवन में मनसा, वाचा, कर्मणा भारत को परतंत्रता से मुक्त कराने में संलग्न रहे।
| Weight | 400 g |
|---|---|
| Dimensions | 22 × 15 × 2 cm |
| Genre |



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