केनोपनिषद
Original price was: ₹300.00.₹270.00Current price is: ₹270.00.
You Save 10%
Kenopanishad यह उपनिषद् वेदमूलक है और तलवकारोपनिषद् के भाष्य का रूप है। अर्जुन देव आर्य ‘विषम’ द्वारा लिखित ‘केनोपनिषद’ हमें उस परमपिता परमेश्वर ‘ओउम्’ के स्वरूप का निरूपण करती है जो मन-इंद्रियों और प्राणों का संचालक है, तथा समस्त ब्रह्मांड को स्वनिर्मित नियमों से चलाता है। इस उपनिषद् का अध्ययन-स्वाध्याय पाठक के मन-मस्तिष्क से मिथ्या भ्रम दूर कर जीवन को सफलता की ओर अग्रसर करता है।
In stock
यह उपनिषद्-केनोपनिषद् भी वेदमूलक है अथवा यह कहें कि वेदों के ही अनुकूल ही मानी गई है। जहाँ ईशोपनिषद् मूल यजुर्वेद की वाजसनेयी संहिता का चालीसवां अध्याय कहा गया है वहीं यह केनोपनिषद् भी तलवकारोपनिषद् के भाष्य का रूप कहा गया है। कोई उपनिषद् ब्राह्मण ग्रन्थों के अन्तर्गत आती है तो कोई शाखाओं के अन्तर्गत आती हैं। ऐसा विद्वानों का मत है कि ब्राह्मण भागों या शाखाओं के अन्तर्गत उपनिषदों में जो भी वर्णित है वह सब उन वेदों की शाखा या ब्राह्मणों में उपलब्ध है, जो कि वेद से ही जानने योग्य परमेश्वर ब्रह्म ‘ओउम्’ के स्वरूप का निरूपण करने वाली है, वह ही उपनिषद् कही जाती है। यह उपनिषद् भी तलवकार शाखान्तर्गत है जो सामवेद की एक सहस्र शाखाओं में से एक शाखा है।
यह उपनिषद् हमें यह बताती है कि वह परमपिता परमेश्वर ‘ओउम्’ जो मन-इन्द्रियों और प्राणों का संचालक है तथा समस्त ब्रह्माण्ड को स्वनिर्मित नियमों और विधानों के अनुसार चलाता है वह कौन है, कैसा है? इस उपनिषद् का अध्ययन-स्वाध्याय-चिन्तन-मनन कर पाठक के मन-मस्तिष्क से इस कोटि के मिथ्या भ्रम दूर हो जाते हैं। उसी के अनुरूप आचरण करने से उसका जीवन सफलता की ओर अग्रसर हो जाता है।
| Weight | 355 g |
|---|---|
| Dimensions | 22.5 × 14.5 × 2 cm |
| Genre |







Reviews
There are no reviews yet.