हिंदी साहित्य का इतिहास
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Hindi Sahitya Ka Itihas हिन्दी साहित्य के इतिहास लेखन की परम्परा को वैज्ञानिक और सारस्वत आधार देने का श्रेय आचार्य रामचन्द्र शुक्ल को है। डॉ. हेतु भारद्वाज की यह कृति हिन्दी साहित्य के आदिकाल से रीतिकाल तक का समग्र और व्यवस्थित परिचय देती है, जो हिन्दी साहित्य के विद्यार्थियों, प्रतियोगी परीक्षाओं में बैठने वाले युवाओं और अन्य जिज्ञासुओं की जिज्ञासाओं का शमन करेगी।
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हिन्दी साहित्य के इतिहास लेखन की परम्परा को वैज्ञानिक तथा सारस्वत आधार देने का श्रेय आचार्य रामचन्द्र शुक्ल को है। परवर्ती साहित्येतिहासकारों ने आचार्य शुक्ल की इतिहास दृष्टि की आलोचना तो की है किन्तु किसी ने भी किसी नयी या भिन्न दृष्टि का परिचय नहीं दिया है। किन्तु हिन्दी साहित्य के इतिहास लेखन की परम्परा निरन्तर प्रवहमान है, यह एक शुभ संकेत है तथा इन प्रयासों से नये-नये तथ्य तो सामने आ ही रहे हैं।
वस्तुतः हिन्दी साहित्य लेखन में इतिहासकारों की दृष्टि केवल साहित्यिक इतिहास पर ही रही है। समाज विज्ञानों के आधुनिक अनुशासनों के अध्ययनों ने यह प्रमाणित कर दिया है कि बिना सामाजिक संदर्भों के साहित्य का वैज्ञानिक इतिहास नहीं लिखा जा सकता। अतः साहित्य के इतिहास लेखन में विद्वान नये संदर्भों का उन्मेष करने का प्रयास कर रहे हैं।
प्रस्तुत कृति हिन्दी साहित्य के इतिहास का (आदिकाल से रीतिकाल तक का) आकलन करती है किन्तु यह आकलन किसी मौलिक स्थापना का दावा नहीं करता तथापि इन कालों के साहित्य का समग्र और व्यवस्थित परिचय देने में यह कृति समर्थ है। आधुनिक काल के साहित्य का इतिहास इस जिल्द में नहीं है क्योंकि आधुनिक काल में साहित्य के विकास की धारा इतनी वैविध्यपूर्ण और समृद्ध रही है कि हर विधा के लिए एक अलग जिल्द चाहिए।
यह कृति हिन्दी साहित्य के विद्यार्थियों, विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में बैठने वाले युवाओं तथा अन्य जिज्ञासुओं की जिज्ञासाओं का शमन करेगी, ऐसा हमारा विश्वास है।
| Weight | 310 g |
|---|---|
| Dimensions | 22 × 14.5 × 1.5 cm |
| Genre |















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