हिंदी काव्यशास्त्र
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Hindi Kavyashastra कविता के स्थापत्य के विविध रूपों को समझने के लिए, ‘हिन्दी काव्यशास्त्र’ एक अनिवार्य मार्गदर्शिका है। रामदेव साहू की यह कृति रस, छंद, अलंकार, काव्य-दोष, काव्यगुण, काव्य रीति, और शब्द शक्ति जैसे काव्य अवयवों का सरल भाषा में विवेचन करती है, जो साहित्य के विद्यार्थियों और सामान्य पाठकों को काव्यास्वादन करने में मदद करती है।
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कविता शब्दों के अर्थ भर से नहीं समझी जा सकती। अंग्रेजी में कविता को “Best words in best order” भी कहा गया है। किन्तु न तो सर्वश्रेष्ठ शब्दों का चयन सरल है न उन्हें सर्वश्रेष्ठ क्रम में रखना ही। इसके लिए स्वयं कवि को भी कविता के स्थापत्य के विविध रूपों को समझना पड़ता है। तभी वह अपनी काव्याभिव्यक्ति के लिए स्थापत्य के नये-नये तरीकों का संधान कर सकता है। भारतवर्ष में काव्यशास्त्र के आचार्यों ने अभिव्यक्ति की विभिन्न तकनीकों का गहन अध्ययन किया और उनके सिद्धान्तों की सोदाहरण व्याख्या की। बिना इन सिद्धान्तों को समझे कविता का आस्वादन भी सम्भव नहीं है।
काव्यशास्त्र के नियमों और सिद्धान्तों को समझना बहुत सरल नहीं है तथापि साहित्य के विद्यार्थी को इनकी सामान्य जानकारी होना अत्यन्त आवश्यक है, किसी कवि के काव्य-संसार का अवगाहन करने से पूर्व पाठक को रस, छंद, अलंकार, काव्य-दोष, काव्यगुण, काव्य रीति, शब्द शक्ति आदि का परिचयात्मक ज्ञान होना ही चाहिए। भारतीय काव्यशास्त्र में इन उपादानों से सम्बन्धित विभिन्न सम्प्रदाय अपने मतानुसार काव्य की व्याख्या करते हैं। इन सभी सम्प्रदायों की अपनी- अपनी दार्शनिक पृष्ठभूमियाँ भी हैं।
किन्तु साहित्य का सामान्य पाठक विभिन्न सम्प्रदायों की दार्शनिक और सैद्धान्तिक व्याख्याओं में न पड़कर रस, छंद, अलंकार, रीति, शब्द शक्ति, दोष, गुण जैसे काव्य अवयवों को समझकर काव्यास्वादन कर सकता है।
प्रस्तुत कृति काव्य के उक्त अवयवों का सरल भाषा में विवेचन करती है तथा सटीक उदाहरणों द्वारा अपने विवेचन को रोचक और ग्राह्य बनाती है। ‘हिन्दी काव्यशास्त्र’ के लेखक का भरसक यह प्रयास रहा है कि इस कृति के सहयोग से पाठक इन काव्य-अवयवों को सरलता से हृदयंगम कर सके।
| Weight | 350 g |
|---|---|
| Dimensions | 22.5 × 14.5 × 1.5 cm |
| Genre |



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