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हम और हमारी शिक्षा

Language: हिंदी
Pages: 248
Edition: Second, 2007
Published Year: 2001
ISBN: 81-7056-226-0

Original price was: ₹350.00.Current price is: ₹315.00.

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भारतीय शिक्षा पद्धति की समस्याओं और उसके भारतीय जीवन से जुड़ाव की आवश्यकता पर केंद्रित निबंधों का संग्रह। यह पुस्तक शिक्षाविदों, शिक्षकों और अभिभावकों को शिक्षा के प्रति एक सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने और संस्कारवान नागरिक बनाने की प्रेरणा देती है।

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मानव जीवन को संस्कारवान बनाने का महती कार्य शिक्षा द्वारा सम्पन्न होता रहा है। किसी भी राष्ट्र के विकास का मानक वहाँ के शिक्षित एवं संस्कारशील नागरिक होते हैं। इस प्रकार राष्ट्र के सर्वतोमुखी विकास का कार्य शिक्षा ही करती है किन्तु यह तभी सम्भव है जब राष्ट्र की शिक्षा पद्धति उस राष्ट्र की आवश्यकताओं के अनुरूप हो। यह तथ्य किसी से छिपा नहीं है कि भारतीय शिक्षा पर पश्चिम का गहरा प्रभाव है जिसके कारण हमारी शिक्षा-पद्धति मूल भारतीय चिन्तन से भटक गयी है। आज की सबसे बड़ी आवश्यकता हमारी शिक्षा को भारतीय जीवन से जोड़ने की है। दुर्भाग्यवश आज भी हमारे मानस अंग्रेजी-शिक्षा पद्धति की ओर ललचाई नजरों से देखते हैं। परिणामस्वरूप, हमारे शिक्षण संस्थान मानसिक रूप से संस्कारवान नागरिक नहीं दे रहे हैं।

इस भयावह दौर में हमारी मनीषा को अपनी जड़ों की ओर लौटने की आवश्यकता है- एक भारतीय शिक्षा पद्धति के विकास की आवश्यकता है। इस कृति के निबन्ध इसी दृष्टिकोण से लिखे गये हैं तथा भारतीय शिक्षा की विविध समस्याओं को रेखांकित करते हुए भारतीय शिक्षा की नयी दिशाओं की ओर संकेत करते हैं। सरल तथा स्पष्ट भाषा में लिखे गये ये निबन्ध शिक्षाविदों, शिक्षकों, अभिभावकों तथा विद्यार्थियों को झकझोरते हैं तथा शिक्षा के प्रति एक सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने की प्रेरणा देते हैं। निश्चय ही यह कृति भारतीय शिक्षा के विविध आयामों को पाठकों के समक्ष खोलती है।

Weight460 g
Dimensions22.5 × 14.5 × 2 cm
Textbook Genre

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