गांधीजी एवं किसान आन्दोलन
Original price was: ₹300.00.₹270.00Current price is: ₹270.00.
You Save 10%
In stock
भारतीय किसान प्राचीनकाल से ही आत्मनिर्भर आर्थिक इकाई के रूप में अपना जीवन-यापन करता रहा है। इसीलिए वर्ष 1860 से पूर्व इतिहास में कोई महत्त्वपूर्ण एवं समग्र किसान आन्दोलन दृष्टिगोचर नहीं होता है। किन्तु ब्रिटिश साम्राज्यवाद ने भारतीय किसान के परम्परागत ढाँचे को अत्यधिक आर्थिक लाभ प्राप्त करने का कुप्रयास कर तोड़ दिया, परिणामतः भारतीय कृषक ‘मरता क्या नहीं करता’ कहावत को चरितार्थ करने पर विवश हुआ।
प्रस्तुत पुस्तक में अंग्रेजी साम्राज्यवाद में हुए ऐसे लगभग सभी महत्त्वपूर्ण आन्दोलनों के इतिहास पर नजर डालते हुए गाँधीजी के नेतृत्व में हुए सभी किसान आन्दोलनों का विश्लेषणात्मक काल- क्रमानुसार विस्तृत वर्णन किया गया है। इस अध्ययन में अधिकतर प्राथमिक स्रोतों से प्राप्त सामग्री का उपयोग किया गया है। भारतवर्ष में गाँधीजी के सान्निध्य में जितने भी अहिंसात्मक आन्दोलन हुए हैं उनमें गाँधीजी के प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष मार्गदर्शन में हुए किसान आन्दोलनों का विस्तृत अध्ययन एक ही ग्रन्थ में उपलब्ध नहीं है। ऐसे में यह पुस्तक पाठकों के लिए और अधिक उपयोगी साबित हो सकती है। इसके अतिरिक्त गाँधीजी के सुझाये सुझावों के अनुसार किस प्रकार भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस किसान आन्दोलनों से जुड़ी तथा किस प्रकार किसान शक्ति का उपयोग भारतीय स्वतन्त्रता आन्दोलन में किया जा सका, का वर्णनात्मक अध्ययन इस कृति में उपलब्ध है।
| Weight | 330 g |
|---|---|
| Dimensions | 22 × 15 × 2 cm |
| Genre | |
| Textbook Genre |







Reviews
There are no reviews yet.