धरती की अद्भुत मछली
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Dharti ki Adbhut machliyein विश्व की लगभग 25-30 हजार जातियों की मछलियों का अध्ययन, जो छोटे तालाबों से लेकर महासागरों तक में पाई जाती हैं। डॉ. परशुराम शुक्ला की यह पुस्तक मछलियों की शारीरिक संरचना, भोजन, प्रजनन, और उनकी आदतों में पाई जाने वाली आश्चर्यजनक विविधताओं को दर्शाती है, जैसे कुछ मछलियों का विषैला होना या लिंग बदलना। यह समुद्री घोड़े और बोनिटो जैसी मछलियों के अनोखे व्यवहार का भी वर्णन करती है।
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विश्व में लगभग 25-30 हजार जातियों की मछलियाँ पायी जाती हैं। इन्हें छोटे-छोटे तालाबों और चावल के खेतों से लेकर सागरों और महासागरों तक में देखा जा सकता है। मछलियों की शारीरिक संरचना, भोजन, प्रजनन तथा इनकी आदतों और व्यवहारों में आश्चर्यजनक विविधता पायी जाती है। सामान्यतया मछलियों का उपयोग भोजन के रूप में किया जाता है, किन्तु कुछ मछलियाँ पफर और मॉरे ईल की तरह विषैली होती हैं। कुछ मछलियाँ तो इतनी विषैली होती हैं कि इनके विष से मानव की मृत्यु तक हो सकती है।
कुछ मछलियाँ प्रजनन काल में समागम नृत्य करती हैं अथवा प्रणय निवेदन करती हैं। सामान्यतया नर मादा की खोज करता है और प्रजनन की इच्छुक मादा के मिल जाने पर उससे प्रणय निवेदन करता है, किन्तु समुद्री घोड़ा और बोनिटो जैसी मादा मछलियाँ नर से प्रणय निवेदन करती हैं।
विश्व की अधिकांश मछलियाँ अपनी जाति में ही समागम करती हैं। किन्तु कुछ मछलियाँ अन्य जातियों की मछलियों के साथ समागम करती हैं। ब्रीम एक ऐसी ही मछली है। यह रोच के साथ समागम करती है। जीव वैज्ञानिकों ने इन दोनों की सहायता से अनेक संकर प्रजातियाँ तैयार की हैं।
यह एक आश्चर्यजनक और रोचक तथ्य है कि बहुत सी मछलियाँ अपना सैक्स बदलती हैं। बैस एक ऐसी ही मछली है। यह जन्म के समय मादा होती है। कुछ समय बाद यह अण्डे भी देती है, किन्तु इसके बाद यह नर हो जाती है और शुक्राणु उत्पन्न करने लगती है।
इस पुस्तक में मछलियों की शारीरिक संरचना, भोजन, प्रजनन आदि के साथ-ही-साथ इनके सम्बन्ध में अनेक रोचक और ज्ञानवर्धक जानकारियाँ दी गयी हैं।
| Weight | 465 g |
|---|---|
| Dimensions | 22.5 × 14.5 × 2 cm |
| Genre | |
| Textbook Genre |














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