दर्प
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श्याम सुन्दर भट्ट का यह ऐतिहासिक उपन्यास मध्ययुगीन भारत में सामंती अहंकार (दर्प) के टकराव को दर्शाता है। यह मेवाड़ के राजसिंह, मुगल शासक औरंगजेब और चारुमती जैसे ऐतिहासिक पात्रों के संघर्ष की कथा को रोचक और विश्वसनीय ढंग से प्रस्तुत करता है।
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किसी ऐतिहासिक आख्यान को केन्द्र में रखकर उपन्यास की रचना अपने-आप में एक चुनौतीभरा कार्य होता है, क्योंकि इतिहास की किसी घटना या चरित्र या युग को औपन्यासिक ढांचे में ढालना अतिरिक्त सजगता की मांग करता है। श्याम सुन्दर भट्ट के प्रस्तुत उपन्यास ‘दर्प’ के केन्द्र में है, सामन्ती स्वभाव की अनिवार्य अभिव्यक्ति अहंकार अथवा दर्प। अहंकार रूप, शौर्य, सत्ता, बल, वैभव आदि का भी हो सकता है। जब विभिन्न सामन्ती पात्रों के अहंकार परस्पर टकराते हैं तो पूरा युग उद्वेलन के दौर से गुजरता है।
इस कृति में लेखक ने मध्ययुगीन इतिहास के उन पृष्ठों को खोला है, जिनमें मेवाड़ के शासक राजसिंह, मुगल शासक औरंगजेब, उदयपुरी बेगम, चारुमती जैसे ऐतिहासिक पात्रों के दर्प-संघर्ष की कथा अंकित है। मेवाड़ के युवा शासक राणा राजसिंह का विवाह औरंगजेब की मंगेतर अपूर्व सौन्दर्य की मूर्ति उदयपुरी बेगम से होता है। औरंगजेब के खंडित दर्प की रक्षा सादुल्लाखाँ चित्तौड़गढ़ की उन दीवारों को ध्वस्त करके करता है, जिनका पुनर्निर्माण राणा राजसिंह ने कराया था।. उधर सलूंबर के रावत रघुनाथ सिंह को मेवाड़ छोड़ने पर विवश होना पड़ता है तो उसका दर्प भी विगलित होता है। किन्तु दर्प विगलन की पराकाष्ठा तब होती है जब उदयपुरी बेगम अपनी प्रतिद्वन्द्वी चारुमती के समक्ष वंदिनी के रूप में उपस्थित होती है।
इतिहास की रक्षा की दृष्टि से इस आख्यान को विश्वसनीय बनाने के लिए लेखक ने आधिकारिक ग्रन्थों, शिलालेखों, ताम्रपत्रों आदि का गहन अध्ययन किया है। लेखक ने इस आख्यान को रोचक ढंग से, सम्प्रेष्य भाषा में इस तरह प्रस्तुत किया है कि पाठक को इसे पढ़ते समय अनिर्वचनीय इतिहास-रस की अनुभूति होती है। यही इस कृति की सबसे बड़ी सफलता है।
| Weight | 340 g |
|---|---|
| Dimensions | 22.5 × 14.5 × 1.5 cm |
| Genre |







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