भारतीय स्वतंत्रता संग्राम
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Bhartiya Svatantrata Sangram भारतीय स्वाधीनता संघर्ष का 1857 से 1950 तक का वृत्तांत, डॉ. वी. एस. भार्गव द्वारा प्रस्तुत। यह पुस्तक 1857 के संघर्ष, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना, गांधीजी के जन-आंदोलनों और देश के विभाजन जैसी महत्वपूर्ण घटनाओं का निष्पक्ष विश्लेषण करती है, साथ ही सुभाषचंद्र बोस और महिलाओं के योगदान पर भी प्रकाश डालती है।
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प्रस्तुत पुस्तक में भारतीय स्वाधीनता संघर्ष का वृत्तान्त 1857 से लेकर 1950 तक का लिपिबद्ध है जब भारत का संविधान लागू हुआ था। 1857 के संघर्ष के कारण एवं परिणामों का वर्णन करते समय लेखक ने उन सब स्रोतों का उपयोग किया है जो गत एक दशक में प्रकाशित हुए हैं। घटनाओं का उल्लेख भी संक्षेप में किया गया है ताकि पाठक एवं विद्यार्थी वर्ग 1857 के स्वरूप एवं महत्त्व का सही मूल्यांकन कर सकें। भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस की 1885 ई. में स्थापना, सूरत का विभाजन, उदारवादियों तथा उग्रवादियों की भूमिका का उल्लेख करने के साथ-साथ मुस्लिम लीग की स्थापना, 1916 ई. का लखनऊ समझौता, खिलाफत आन्दोलन इत्यादि साम्प्रदायिक घटनाओं का विश्लेषण नए सिरे से किया गया है। महात्मा गाँधी के द्वारा प्रारम्भ किए गए जन-आन्दोलनों का वर्णन अन्य पुस्तकों की तुलना में अधिक निष्पक्ष ढंग से किया गया है। देश के विभाजन के साथ भारत की स्वतन्त्रता-प्राप्ति तथा स्वाधीनता आन्दोलन में कायदेआजम मुहम्मद अली जिन्ना की विवादास्पद भूमिका का वर्णन लेखक ने अपने दीर्घ अनुभवों के आधार पर किया है। स्वतन्त्रता-प्राप्ति में गाँधी तथा नेहरू की भूमिका के साथ-साथ नेताजी सुभाषचन्द्र बोस के योगदान का उल्लेख अधिक विस्तार के साथ किया गया है। महिलाओं के योगदान का वर्णन सर्वप्रथम करके पुस्तक को वास्तविकता के निकट पहुँचा दिया है। स्वाधीनता आन्दोलन में विभिन्न कृषक आन्दोलनों की भूमिका एवं महत्त्व पर प्रकाश डाला गया है। राजस्थान तथा यहाँ के स्वतन्त्रता सेनानियों की भूमिका पर प्रकाश डालकर पुस्तक को अधिक-से-अधिक उपयोग बना दिया गया है।
| Weight | 335 g |
|---|---|
| Dimensions | 22.5 × 14.5 × 1.5 cm |
| Genre | |
| Textbook Genre |



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