भारत का इतिहास (प्रारंभ से 1200 ई. तक)
Author(s): डॉ. कालूराम शर्मा, डॉ. प्रकाश व्यास
University: जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर
Semester / Year: Year 1
Language: हिंदी
Format: पेपरबैक
Pages: 512
Publisher: पंचशील प्रकाशन
₹325.00
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विषय-सूची
- इतिहास के स्त्रोत : इतिहास पर भूगोल का प्रभाव
इतिहास के स्रोत – भारतीय धर्मग्रन्थ – ब्राह्मण धर्म ग्रन्थ, बौद्ध धर्म ग्रन्थ, जैन धर्म ग्रन्थ। ऐतिहासिक और समसामयिक ग्रन्थ। पुरातत्त्वसम्बन्धी साक्ष्य- अभिलेख या उत्कीर्ण लेख, कलाकृतियाँ, स्मारक और भग्नावशेष, मिट्टी के बर्तन व मुद्रायें, सिक्के। विदेशियों के विवरण-यूनानी लेखक, चीनी लेखक, तिब्बती लेखक, अरब लेखक । इतिहास पर भूगोल का प्रभाव – भौगोलिक विभाग, परिवेश का प्रभाव, परिस्थितियों से निर्मित भौगोलिक एकता। परिस्थितियों के प्रभाव की समीक्षा। लोगों का सर्वेक्षण-भारत की नस्लें अथवा आदिजातियाँ। - पूर्वेतिहासिक शिकारी समूह
पृथ्वी पर जीव का आविर्भाव, मानव-समप्राणी का आविर्भाव, मनुष्य का आदि पूर्वज । भारत में पूर्व-पाषाणकाल – अनुसन्धान, अनुक्रम और भौगोलिक बाँट, प्राक्सोआँ सभ्यता, सोआँ सभ्यता। पश्चिम भारत। मध्य भारत। पूर्वी क्षेत्र। दक्षिणी क्षेत्र। पूर्वेतिहासिक शिकारी समूह और उनकी कठिनाइयाँ। मध्य-पाषाण काल। कन्दरा कला। - नव पाषाण – ताम्रयुगीन संस्कृतियाँ
नव पाषाण काल-नव-पाषाणयुगीन सभ्यता के केन्द्र। नव पाषाण युग के औजार, निवास, बर्तन, उद्योग-धन्धे और व्यापार, भोजन एवं अग्नि का प्रयोग, मृतक संस्कार, समुदाय, जातियाँ एवं वर्ग, पारिवारिक जीवन, धार्मिक जीवन, भाषा और कला, कन्दरा-चित्रकला, नव-पाषाण युग की देन। नव-पाषाण-ताम्रयुगीन संस्कृतियाँ – ताम्र तथा कांस्य युग। पश्चिमी भारत की ताम्र-कांस्ययुगीन संस्कृतियाँ- क्वेटा संस्कृति, अभरी-नल संस्कृति, कुल्ली संस्कृति, झोब संस्कृति । भारत में अन्यत्र ताम्र-युग के अवशेष । - हड़प्पा सभ्यता
हड़प्पा सभ्यता के केन्द्रों की खुदाई का इतिहास। हड़प्पा सभ्यता का उद्गम, सभ्यता का विस्तार क्षेत्र, सभ्यता का काल, सभ्यता के निर्माता। नगर- निर्माण-दुर्ग या गढ़ी, सड़कें और गलियाँ, भवन-निर्माण, विशिष्ट इमारतें, विशाल स्नानकुण्ड, अन्य विशिष्ट भवन, दूषित जल निकास व्यवस्था। धार्मिक विश्वास-मातृदेवी की पूजा, परम पुरुष की उपासना, प्रजननशक्ति की पूजा, वृक्ष पूजा, पशु पूजा, प्रतीक मुद्रा, धार्मिक प्रथाएँ, मृतक संस्कार। सामाजिक जीवन-समाज का स्वरूप, परिवार, नारी का स्थान, रहन-सहन, खान-पान, आमोद-प्रमोद, शिक्षा, लिपि, कला। नगरों का पतन।उत्तरकालीन हड़प्पा संस्कृतियाँ- कालीबंगा की सभ्यता- कालानुक्रम, उत्खनन कार्य, नगर एवं भवन निर्माण, बर्तन एवं अन्य सामग्री, आर्थिक जीवन, धार्मिक विश्वास। बनास नदी सभ्यता, आहड़ की सभ्यता – अनुसन्धान कार्य, भवन निर्माण, मृद्भाण्ड और बर्तन, मुद्राएँ, मुहरें एवं उपकरण, मणियाँ एवं आभूषण, कृषि, व्यवसाय एवं रहन-सहन। बालाथल की सभ्यता। बागौर की संस्कृति-प्रस्तर उपकरण, ताम्र उपकरण, अस्थियाँ, मिट्टी के बर्तन, आभूषण, मकानों के अवशेष। हड़प्पा संस्कृति और वैदिक संस्कृति। आधुनिक हिन्दू धर्म के साथ तुलना। - वैदिक समाज, धर्म, राज्य व्यवस्था और अर्थव्यवस्था
आर्यों का मूल स्थान-यूरोप, हंगरी अथवा डेन्यूब नदी की घाटी, जर्मन क्षेत्र, दक्षिणी रूस। मध्य एशिया। उत्तरी ध्रुव। भारत। भारत में आर्यों का आगमन तथा प्रसार। वैदिक साहित्य-ऋग्वेद, सामवेद, अथर्ववेद, यजुर्वेद, ब्राह्मण ग्रन्थ, अरण्यक, उपनिषद, वेदांग, स्मृति साहित्य। वैदिक समाज – परिवार, स्त्रियों का स्थान, विवाह, वर्ण-व्यवस्था। राज्य-व्यवस्था- आर्य-जन, राजनीतिक संगठन, शासन-पद्धति, राजा-अधिकार एवं कर्त्तव्य, प्रमुख अधिकारी, सभा और समिति, न्याय-व्यवस्था, युद्ध-विधि। अर्थ-व्यवस्था-कृषि, पशु-पालन, उद्योग-धन्धे, व्यापार-वाणिज्य। संस्कृति और धर्म- नगर एवं गृह, शिक्षा, लेखन कला, वेश-भूषा, खानपान, मनोरंजन, नैतिकता। धार्मिक जीवन- देव समूह, देवी-देवताओं के वर्ग, पूजा-उपासना विधि, पंच महायज्ञ और तीन ऋण। अन्य बातें। तत्त्व-चिन्तन की लहर। आश्रम-व्यवस्था। - भारत में लोहयुगीन संस्कृतियाँ: दक्षिण, सुदूर दक्षिण और उत्तर में मेगालिथ
लोहे की खोज, भारत में लोहयुग की शुरूआत। महाकाव्यकालीन सभ्यता एवं संस्कृति-रचनाकाल, कथावस्तु, राजनीतिक व्यवस्था, सामाजिक जीवन, आर्थिक जीवन, धार्मिक जीवन, शिक्षा। महाजनपदों का युग-सोलह महाजनपद। गणराज्यों की शासन प्रणाली। गणराज्यों के पतन के कारण। मेगालिथ (मृतक स्मारक)- मेगालिथ का अर्थ। मेगालिथ के विभिन्न प्रकार। - सोलह संस्कार, विवाह और सम्पत्ति-सम्बन्ध
संस्कार का अर्थ और महत्त्व। संस्कारों का विवरण- गर्भाधान, पुंसवन, सीमान्तोन्नयन, जातकर्म, नामकरण, निष्क्रमण, अन्नप्राशन, चूड़ाकर्म, कर्णवेध, उपनयन संस्कार, समावर्तन, विवाह- विवाह के प्रकार, अन्त्येष्टि संस्कार । सम्पत्ति-सम्बन्ध-संयुक्त परिवार और सम्पत्ति, पैतृक सम्पत्ति का विभाजन, गृह और खेतों का स्वामित्व । - वर्ण, जाति और पुरुषार्थ
वर्ण-व्यवस्था-वर्ण-व्यवस्था की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि। वर्ण-संघर्ष। वर्ण- व्यवस्था की उत्पत्ति। उत्तरवैदिक युग में वर्ण-व्यवस्था, सूत्रकाल में वर्ण- व्यवस्था। जाति और व्यावसायिक वर्ग, जाति-प्रथा की विशेषताएँ, वर्ण और जाति में भेद। जाति-प्रथा की उत्पत्ति। जाति-प्रथा का विकास। जाति-प्रथा के गुण, जाति-प्रथा के दोष। व्यावसायिक वर्ग-ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र, सुवर्णकार, कर्मार, तंतुवाय, फुलाल, तक्षन्, भिषक, मछुये। चार पुरुषार्थ-धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष-मोक्ष प्राप्ति के मार्ग। पुरुषार्थ की समीक्षा। - जैन धर्म और बौद्ध धर्म
धार्मिक आन्दोलनों के उदय के कारण। जैन धर्म – पार्श्वनाथ, महावीर स्वामी की जीवनी, जैन धर्म के सिद्धान्त, जैन धर्म में विभाजन; जैन धर्म का प्रचार एवं प्रसार, जैन धर्म के व्यापक न होने के कारण, जैन धर्म की भारतीय संस्कृति को देन। बौद्ध धर्म – महात्मा बुद्ध की संक्षिप्त जीवनी, ज्ञान का प्रचार, बौद्ध धर्म के प्रमुख सिद्धान्त, महात्मा बुद्ध के अन्य विचार, बौद्ध धर्म का विभाजन, बौद्ध धर्म की लोकप्रियता के कारण, बौद्ध धर्म के भारत से लोप होने के कारण। भारतीय संस्कृति को बौद्ध धर्म की देन। जैन धर्म और बौद्ध धर्म का तुलनात्मक अध्ययन। - चन्द्रगुप्त मौर्य का उदय : मौर्य प्रशासन
मौर्य साम्राज्य का ऐतिहासिक महत्त्व। चन्द्रगुप्त मौर्य – जाति एवं प्रारम्भिक जीवन, चाणक्य का प्रारम्भिक जीवन, विजय अभियान की शुरूआत कहाँ से हुई, पंजाब और सिन्ध की विजय, मगध विजय, अन्य विजयें, साम्राज्य विस्तार, चन्द्रगुप्त का धर्म, चनद्रगुप्त का मूल्यांकन। मौर्य प्रशासन – साम्राज्य का विस्तार, राजत्व-सिद्धान्त। केन्द्रीय प्रशासन राजा। चन्द्रगुप्त मौर्य का शासन- प्रबन्ध-मन्त्रिपरिषद्, मन्त्रिण, अन्य पदाधिकारी, प्रान्तीय शासन, नगरों का प्रबन्ध, न्याय-व्यवस्था, गुप्तचर व्यवस्था, राज्य की आय के साधन, सैनिक- शासन, जनहितकार्य। मेगस्थनीज का विवरण। अशोक का शासन- प्रबन्ध-मन्त्रिपरिषद्, प्रान्तीय शासन, प्रमुख अधिकारी, अशोक के प्रशासकीय सुधार। मौर्यकालीन अर्थव्यवस्था- कृषि, पशुपालन, उद्योग-धन्धे, श्रेणियाँ, व्यापार, मुद्रा। - अशोक : अशोक का धर्म और उसका प्रसार : मौर्यकला और स्थापत्य
बिन्दुसार। सम्राट अशोक- जानकारी के साधन, प्रारम्भिक जीवन और परिवार, प्रान्तीय शासक के रूप में। अशोक की विजयें, अशोक का धर्म-परिवर्तन, अशोक और बौद्ध धर्म के प्रचारक के रूप में अशोक। अशोक का धम्म-धम्म क्या है? अशोक की धर्म-विजय नीति की आलोचना। अशोक का इतिहास में स्थान। आशोक के उतराधिकारी। मौर्य साम्राज्य के पतन के कारण। मौर्यकालीन सभ्यता और संस्कृति- सामाजिक जीवन, धार्मिक अवस्था, शिक्षा एवं साहित्य। मौर्यकालीन कला- स्थापत्य कला, मूर्ति कला। - मौर्योत्तर सामाजिक एवं सांस्कृतिक विकास : व्यापार, कला और स्थापत्य
(शुंग, पश्चिमी क्षत्रप, कुषाणों और सातवाहनों के विशेष सन्दर्भ में) शुंगवंश की स्थापना-पुष्यमित्र शुंग – विदर्भ युद्ध, यवन युद्ध, अश्वमेघ यज्ञ, पुष्यमित्र शुंग का राज्य-विस्तार, पुष्यमित्र शुंग के उत्तराधिकारी। कण्व वंश। सातवाहन वंश – सातवाहनों की जाति, सातवाहनों का मूल स्थान, सातवाहनों का उदय, सातवाहन शासक-गौतमी पुत्र शातकर्णी, गौतमी पुत्र के उत्तराधिकारी। कुषाण वंश-कुषाण जाति का परिचय, कुजुल-कदफिस, विमकदफिस। कनिष्क प्रथम-कनिष्क की तिथि, कनिष्क की दिग्विजय, कनिष्क का धर्म, बौद्ध संगीति, कनिष्क का मूल्यांकन। पश्चिमी क्षत्रप – भारत पर शकों के आक्रमण, भारतीय शक राज्य और उसके शासक। शक क्षत्रप -पश्चिमी भारत के क्षत्रप क्षहरात वंश – भूमक, नहपान। उज्जयिनी तथा काठियावाड़ के शक- क्षत्रप चष्टन, रुद्रदामन। शक शक्ति का अन्त। सामाजिक एवं सांस्कृतिक विकास-सामाजिक व्यवहार में लचीलापन, स्त्रियों की स्थिति, भाषा और साहित्य। वैदिक धर्म का उत्थान। कला और स्थापत्य- स्तूप, गुहा-मन्दिर, मूर्तिकला-गान्धार कला, मथुरा-शैली, अमरावती शैली, सिक्के बनाने की कला। शिल्प तथा व्यापार- शिल्प, श्रेणी, व्यापार। - संगम युग : साहित्य, समाज और संस्कृति
संगम का अर्थ। प्रथम संगम, द्वितीय संगम, तृतीय संगम। संगम साहित्य का काल। संगम साहित्य में प्रतिबिम्बित राजनीतिक स्थिति- चेर राजवंश, चोल राजवंश, पाण्ड्य राजवंश। संगमकाल के शासकों का प्रशासन- राजा, मन्त्रिपरिषद् और अधिकारी, नगर सभा तथा ग्राम सभा, न्याय-व्यवस्था, सैन्य- व्यवस्था, राजस्व-व्यवस्था। आर्थिक जीवन- कृषि, उद्योग-धन्धे, व्यापार- वाणिज्य। सामाजिक जीवन- स्त्रियों की स्थिति, विवाह, सती प्रथा, आवास, खान-पान, वेशभूषा एवं श्रृंगार, मनोरंजन, मृतक संस्कार। कला और साहित्य। धार्मिक जीवन-वैदिक धर्म का प्रभाव, बहुदेववाद । - स्कन्दगुप्त तक गुप्त इतिहास का सर्वेक्षण
गुप्तों का परिचय। गुप्तों का उदय। चन्द्रगुप्त प्रथम। समुद्रगुप्त – समुद्रगुप्त की नीति, दिग्विजय योजना- प्रथम आक्रमण, दक्षिणापथ की विजय, आर्यावर्त्त पर द्वितीय आक्रमण, आटविक नरेश, सीमान्त राजाओं पर विजय, प्रत्यन्त नृपतियों का आत्मसमर्पण, प्रत्यर्पण की नीति, अश्वमेघयज्ञ, समुद्रगुप्त का चरित्र। रामगुप्त। चन्द्रगुप्त द्वितीय विक्रमादित्य – चन्द्रगुप्त द्वितीय के वैवाहिक सम्बन्ध, चन्द्रगुप्त द्वितीय की दिग्विजय – गणराज्यों का विनाश, शक क्षत्रपों का अन्त, पूर्वी प्रत्यन्त राज्यों का अन्त, पश्चिमोत्तर भारत पर आधिपत्य, सम्राट ‘चन्द्र’ का विवाद, साम्राज्य विस्तार, राजधानियाँ, अश्वमेघ, शासन-प्रबन्ध, मूल्यांकन। कुमारगुप्त महेन्द्रादित्य – अश्वमेघ, पुष्यमित्रों का आक्रमण, हणों का आक्रमण। स्कन्द्रगुप्त-हूणों के साथ संघर्ष, मूल्यांकन। गुप्तों का अवसानकाल। गुप्त साम्राज्य की समाप्ति। गुप्त साम्राज्य के पतन के कारण। फाह्यान। - गुप्तकालीन कला, स्थापत्य, साहित्य, दर्शन, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी : दक्षिण के मन्दिर
ललित कलाएँ- संगीत, अभिनय कला, चित्रकला – अजन्ता की चित्रकला, बाघ की चित्रकला। वास्तुकला – राजप्रासाद, मन्दिर, स्तूप, मूर्तिकला – बौद्ध प्रतिमाएँ शिव मूर्तियाँ, वैष्णव मूर्तियाँ, वराह प्रतिमाएँ। साहित्यिक विकास-काव्य, नाटक, पारिभाषिक ग्रन्थ, धार्मिक ग्रन्थ- बौद्ध साहित्य, जैन साहित्य। दर्शन-सांख्य दर्शन, योग दर्शन, न्याय दर्शन वैशेषिक दर्शन, मीमांसा दर्शन, वेदान्त दर्शन, चार्वाक दर्शन । विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी – ज्योतिष और गणित, प्रौद्योगिकी। दक्षिण के मन्दिर-राष्ट्रकूट मन्दिर, मूर्तिकला। पल्लव मन्दिर – महेन्द्र शैली, मामल्ल शैली, राजसिंह शैली, अपराजित शैली, मूर्तिकला। चोल कला- मन्दिर, मूर्तिकला। चालुक्य मन्दिर। - स्त्रियों की स्थिति
संयुक्त परिवार में नारी का स्थान। आश्रम-व्यवस्था में नारी का स्थान। विवाह-वैदिक युग में विवाह पद्धति, विवाह के प्रकार, नियोग और विधवा विवाह, विवाह-विच्छेद, बाल-विवाह, सम्पत्ति का अधिकार। सती प्रथा। पर्दा- प्रथा । देवदासी प्रथा। दास प्रथा और बेगार। - गुप्त प्रशासन, व्यापार और मुद्रायें
गुप्त शासन प्रबन्ध – राजत्व का सिद्धान्त, केन्द्रीय शासन, प्रान्तीय शासन, जिले का शासन, ग्राम शासन, नगर-शासन, शासन के प्रमुख विभाग, न्याय विभाग, लोकोपकारी कार्य विभाग, सैन्य विभाग, आरक्षा विभाग। कृषि और राजस्व । व्यापार और वाणिज्य – उद्योग-धन्धे, श्रेणियाँ, व्यापार-आन्तरिक व्यापार, विदेशी व्यापार। गुप्तकालीन मुद्राएँ। - हर्षवर्धन
पुष्यभूति वंश का परिचय। हर्षवर्धन – हर्ष की दिग्विजय – वल्लभी नरेश, पुल्केशिन द्वितीय, सिन्ध, पूर्वी अभियान, हर्ष का साम्राज्य विस्तार। शासन- प्रबन्ध-केन्द्रीय शासन, न्याय विभाग, राजस्व विभाग, सेना व पुलिस विभाग, सार्वजनिक कार्य विभाग। प्रान्तीय शासन, ग्राम शासन, शासन का स्वरूप। समीपस्थ एवं दूरस्थ शासकों के प्रति व्यवहार। हर्ष की मृत्यु और उसका परिणाम। हर्ष का व्यक्तित्व एवं मूल्यांकन – हर्ष का धर्म, कन्नौज का सम्मेलन, प्रयाग की सभा, धार्मिक नीति, हर्ष की साहित्यिक अभिरुचि। ह्वेनसांग – राजनीतिक स्थिति, सामाजिक स्थिति, धार्मिक स्थिति, आर्थिक स्थिति, शिक्षा, साहित्य एवं कला। - पल्लव, चालुक्य और चोलों का भारतीय संस्कृति को योगदान
पल्लव वंश-उत्पत्ति। सिंहविष्णु, महेन्द्र वर्मा, नरसिंह वर्मा, नरसिंह वर्मा द्वितीय, नन्दि वर्मा द्वितीय। पल्लव राज्य का अन्त। पल्लवकालीन संस्कृति-शासन-व्यवस्था, शिक्षा और साहित्य, कला का विकास, धार्मिक दशा। चालुक्य वंश-चालुक्यों की उत्पत्ति, शाखाएँ। वातापी का चालुक्य वंश-पुल्केशिन प्रथम, कीर्ति वर्मा, मंगलेश, पुल्केशिन द्वितीय, पुल्केशिन के उत्तराधिकारी। चालुक्य शक्ति का अन्त। चोल वंश-चोलवंश की प्राचीनता-आदित्य प्रथम, परान्तक प्रथम, राजराज प्रथम, राजेन्द्र प्रथम, राजाधिराज प्रथम, वीरराजेन्द्र, कुलोतुंग। चोलों की शासन-व्यवस्था – प्रशासन की इकाइयाँ; स्थानीय प्रशासन, न्याय-व्यवस्था, सेना और नौ-सेना। चोलों की अर्थ-व्यवस्था-राज्य की आय-व्यय, कृषि, उद्योग-धन्धे, व्यापार। पल्लव, चालुक्य और चोलों का योगदान । - सर्वोच्चता के लिये त्रिपक्षीय संघर्ष
पृष्ठभूमि। त्रिपक्षीय संघर्ष का पहला चरण। दूसरा चरण । तृतीय चरण। चतुर्थ चरण। पंचम चरण। छठा एवं अन्तिम चरण। - मुस्लिम आक्रमण का देशज प्रतिरोध : मिहिरभोज प्रतिहार और पृथ्वीराज चौहान तृतीय : मुहम्मद बिन कासिम, महमूद गजनी और मुहम्मद गौरी के आक्रमणों का प्रभाव
मुहम्मद-बिन-कासिम का सिन्ध पर आक्रमण। अरब आक्रमण का महत्त्व एवं प्रभाव ।
मिहिरभोज प्रतिहार – प्रतिहारों का अधिवासन, प्रारम्भिक शासक – नागभट्ट प्रथम, वत्सराज, नागभट्ट द्वितीय, भोज प्रथम (मिहिरभोज) – कालिंजर तथा गुर्जरात्र पर अधिकार, गुहिल और कलचुरियों पर विजय, बंगाल के पालों के साथ संघर्ष, दक्षिण-पश्चिम के प्रदेश, पश्चिमी भारत व मध्य प्रदेश पर अधिकार, राष्ट्रकूटों से युद्ध, उत्तर-पश्चिम में अभियान, भोज के अन्तिम दिन, मूल्यांकन । महमूद गजनवी – सुबुक्तगीन। महमूद गजनवी – भारत पर आक्रमण। महमूद के आक्रमणों का प्रभाव।
पृथ्वीराज चौहान तृतीय – चौहानवंश। तत्कालीन परिस्थिति। पृथ्वीराज की प्रारम्भिक विजयें। पृथ्वीराज का तुर्कों से संघर्ष – तराइन का प्रथम युद्ध, तराइन का दूसरा युद्ध, पृथ्वीराज तृतीय का अन्त, युद्ध के परिणाम। पृथ्वीराज तृतीय का मूल्यांकन ।
मुहम्मद गोरी के आक्रमण – गोरवंश का उत्कर्ष। आक्रमण के उद्देश्य। भारत पर आक्रमण – मुल्तान और सिन्ध पर आक्रमण, गुजरांत पर आक्रमण, पंजाब पर आक्रमण, पृथ्वीराज तृतीय के विरुद्ध अभियान, कन्नौज पर आक्रमण, ऐबक और खलजी की विजयें, गोरी के अन्तिम दिन। मुहम्मद गौरी के भारत पर आक्रमण के परिणाम।
| Weight | 470 g |
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| विश्वविद्यालय |







सूरज फिर उगेगा
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