अज्ञेय का काव्य: जीवन-सत्य और दर्शन
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Agyea Ka Kavya: Jeevan-Satya Aur Darshan सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन अज्ञेय, प्रयोगवाद के प्रणेता और नई कविता के शलाका पुरुष थे। डॉ. मीता शर्मा की यह कृति अज्ञेय के काव्य पर जीवन-सत्य, जीवन मूल्य और दर्शन की दृष्टि से विचार करने वाली एक गंभीर, विश्लेषणात्मक और आलोचनात्मक पुस्तक है। यह भारतीय और पाश्चात्य दार्शनिक चिन्तन, तथा आधुनिक काव्यान्दोलनों का अज्ञेय के काव्य पर प्रभाव का प्रमाण-सम्मत प्रतिपादन करती है।
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सृजनशील प्रतिभाएँ युग परिवर्तनकारी तथा नवोन्मेषी रचना प्रवृत्तियों के साहित्य को समृद्ध करती हैं। सर्जनशील व नवोन्मेषशालिनी प्रतिभा के धनी थे-सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन अज्ञेय। यह सर्वविदित है कि अज्ञेय प्रयोगवाद के प्रणेता व नई कविता के शलाका पुरुष हैं। अतीत की उपलब्धियों, भविष्य की आकांक्षाओं और वर्तमान की सक्रियता का समुच्चय है अज्ञेय का रचनाशील व्यक्तित्व। उनमें दायित्वबोध और भावबोध की तीखी संवेदनाओं का समन्वय भी है। इसी भावभूमि पर उनका समस्त रचनाकर्म सृजित है, जो एक युग की संवेदना का प्रतिनिधि संवाहक है।
प्रस्तुत कृति जीवन-सत्य व दर्शन की दृष्टि से अज्ञेय की कविता पर विचार करने वाली एक गम्भीर, विश्लेषणात्मक व आलोचनात्मक कृति है। इस कृति में साहित्य को समाज की प्रतिकृति मानते हुए यह स्थापना की गई है कि समाज में परम्परा के प्रति सम्मान के साथ नवीनता व विकास की प्रक्रिया तभी सम्भव है जब जीवन-सत्य, मूल्य व दर्शन के रिश्ते को साहित्य में बराबर अभिव्यक्ति मिलती रहे। इस कृति में अज्ञेय की कविता को इसी संदर्भ में समझने की कोशिश की गयी है। इस पुस्तक में भारतीय व पाश्चात्य दार्शनिक चिन्तन और आधुनिक काव्यान्दोलनों का अज्ञेय के काव्य पर प्रभाव का प्रमाण सम्मत प्रतिपादन करने का प्रयास किया गया है।
हमारा विश्वास है कि अज्ञेय के काव्य को जीवन-सत्य, जीवन मूल्य तथा दर्शन के विविध पक्षों की दृष्टि से समझने में यह कृति अध्येताओं के लिए अपरिहार्य सिद्ध होगी।
| Weight | 505 g |
|---|---|
| Dimensions | 22.5 × 14.5 × 2.5 cm |
| Genre |



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