वीरेन्द्र प्रकाश शर्मा

प्रो. वीरेन्द्र प्रकाश शर्मा भारत के प्रतिष्ठित समाजशास्त्री, शिक्षाविद् एवं शोधकर्ता रहे हैं। उन्होंने तीन दशकों से अधिक समय तक बनस्थली विश्वविद्यालय, बनस्थली में समाजशास्त्र विभागाध्यक्ष के रूप में कार्य करते हुए शिक्षण, शोध एवं अकादमिक नेतृत्व के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इसके अतिरिक्त वे राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर के सामाजिक विज्ञान संकाय से भी सक्रिय रूप से जुड़े रहे तथा अनेक शोध परियोजनाओं का सफलतापूर्वक संचालन किया।

समाजशास्त्र एवं सामाजिक अनुसंधान के क्षेत्र में उनका योगदान अत्यंत व्यापक रहा है। उन्होंने राजस्थान विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र एवं मानवशास्त्र विभागों में अतिथि प्राध्यापक के रूप में अध्यापन किया तथा इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (IGNOU) एवं वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय के अध्ययन केन्द्रों से भी जुड़े रहे। उन्होंने समाजशास्त्र, मानवशास्त्र तथा शोध पद्धति जैसे विषयों का अध्यापन करते हुए अनेक विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों का मार्गदर्शन किया।

प्रो. शर्मा एक विपुल लेखक भी थे। उन्होंने समाजशास्त्र एवं सामाजिक विज्ञान के विविध विषयों पर 100 से अधिक पुस्तकों का लेखन किया। उनके व्याख्यान, शोध एवं लेखन ने समाजशास्त्रीय अध्ययन को नई दृष्टि प्रदान की तथा उन्हें राजस्थान के प्रमुख समाजशास्त्रीय चिंतकों एवं लेखकों में विशिष्ट स्थान दिलाया।

समाजशास्त्र के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए राजस्थान समाजशास्त्रीय संघ द्वारा उन्हें वर्ष 2010 में लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया। शिक्षण, शोध एवं लेखन के माध्यम से उन्होंने भारतीय समाज, संस्कृति एवं सामाजिक परिवर्तन के अध्ययन को समृद्ध बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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    ग्रामीण एवं नगरीय समाजशास्त्र

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    Gramin evam Nagariya Samajshastra ‘ग्रामीण एवं नगरीय समाजशास्त्र’ ग्रामीण एवं नगरीय समाजों से संबंधित यू.जी.सी. द्वारा निर्धारित पाठ्यक्रम के लगभग सभी महत्वपूर्ण विषयों की विवेचना करती है। वीरेंद्र प्रकाश शर्मा की यह पुस्तक ग्रामीण और नगरीय समाजों के विशिष्ट लक्षणों—जाति, परिवार, व्यवसाय, औद्योगिकी—का वर्णन करती है, जो विभिन्न विश्वविद्यालयों के छात्रों, प्रतियोगियों, और योजनाकारों के लिए उपयोगी है।

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